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खांडसारी इकाइयों की गन्ना पेराई में आई तेजी

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खांडसारी इकाइयों की गन्ना पेराई में आई तेजी
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बिजनौर। जिले में खांडसारी इकाइयों की संख्या पिछले साल के मुकाबले बढ़ी हैं। खांडसारी इकाइयों ने सात लाख क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई कर ली है। खांडसारी इकाइयों द्वारा चालू सीजन में बिजनौर चीनी मिल जैसी तीन चीनी मिलों से अधिक गन्ना पेरने का अनुमान है। इससे किसान अधिक रकबे में गेहूं की बुवाई कर सकेगा। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य के अनुसार माह के आखिर तक पेराई करने वाली इकाइयों की संख्या बढ़ सकती है। जिले में गन्ने का उत्पादन बढ़ा है।
चीनी मिलों पर गन्ना डालने को लेकर मारामारी रहती है। जिले में नौ चीनी मिलें हैं। शासन ने पिछले साल खांडसारी इकाइयों की लाइसेंस नीति का सरलीकरण किया था। बदलाव बंद पड़ी खांडसारी इकाइयों के लिए संजीवनी लेकर आया। खांडसारी इकाइयों ने एक दो को छोड़ अधिकांश ने दीपावली बाद पेराई शुरू की है। बताया गया की 15 नवंबर तक बिजनौर क्षेत्र की 46 तथा धामपुर क्षेत्र की 15 अर्थात कुल 61 इकाइयों ने पेराई शुरू कर दी है। सहायक चीनी आयुक्त ने बताया कि करीब पौने आठ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो गई है। इसमें बिजनौर क्षेत्र की इकाइयों ने पांच लाख क्विंटल गन्ना पेरा है। करीब 75 हजार क्विंटल गुड़ बना है। मौर्य के अनुसार माह के आखिर तक सात-आठ खांडसारी इकाई और चल जाएंगी। खांडसारी इकाइयों पर रेट अच्छे हैं। गन्ने की खूब आमद है।
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तीन चीनी मिलों के बराबर गन्ना पेराई का लक्ष्य
बिजनौर। सहायक चीनी आयुक्त ने बताया कि पिछले साल खांडसारी इकाइयों ने बिजनौर चीनी मिल जैसी दो चीनी मिलों के बराबर गन्ना पेर लिया था। इस साल खांडसारी इकाइयों की संख्या बढ़ी है। नए लाइसेंस मंजूर हुए हैं। कुछ इकाइयों ने पेराई क्षमता भी बढ़ा ली है। अनुमान है कि इस साल तीन चीनी मिलों की क्षमता के बराबर गन्ना पेरा जाएगा। इससे किसानों को बड़ी राहत मिल सकेगी। अधिक रकबे में गेहूं की बुवाई हो सकेगी। शासन इकाइयों को बेहतर सुविधाएं देने में लगा है।
राब मुनाफे का सौदा
बिजनौर। खांडसारी इकाइयों पर बन रही राब संचालकों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि जिले से राब बिहार तथा पश्चिम बंगाल को सप्लाई होती है। इन दोनों राज्यों में राब लोकप्रिय खाद्य पदार्थ हैं। मांग काफी है। दोनों राज्यों के व्यापारी स्थानीय व्यापारियों के माध्यम से खरीदारी करते हैं। अब तक 15 हजार क्विंटल राब बन गई है। खांडसारी संचालकों को फायदा है। किसानों को भी समय से गन्ना भुगतान में मदद मिलती है।
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गुजरात और राजस्थान में है मांग
बिजनौर। जिले की खांडसारी इकाइयों पर बना गुड़ गुजरात, तथा राजस्थान भेजा जाता है। किरतपुर व नहटोर क्षेत्र की कुछ खांडसारी इकाइयों की गुड़ इन राज्यों में काफी मांग है। अब तो जिले में जैविक गुड़ भी बनने लगा है। कुछ किसान जैविक गुड़ दिल्ली सप्लाई कर रहे हैं। हल्दौर ब्लाक के गांव मोहनपुर चांदा नंगली निवासी व आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर रहे स्व. यशपाल सत्य ने जैविक गुड़ बनाने की जिले में शुरुआत की थी। उनके भाई इसे कर रहे हैं। खारी क्षेत्र के समरपाल सिंह जैविक गुड़ बना रहे हैं।
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