आने वाला गन्ना पेराई सत्र किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। किसानों ने गन्ने के रकबे में 11.56 प्रतिशत वृद्धि कर दी है। साथ ही गन्ने की फसल भी खेतों में अच्छी खड़ी है। लेकिन चीनी की घटी कीमतों को देखते हुए चीनी मिल गन्ने की मांग ज्यादा नहीं कर रहे हैं।
हालांकि पिछले साल के पेराई सत्र की मांग के मुकाबले गन्ना मांग में वृद्धि की गई है, लेकिन यह पिछले साल की गई पेराई के बराबर भी नहीं है। गन्ने के रकबे में हो चुकी वृद्धि और पैदावार में संभावित वृद्धि को देखते हुए अगले पेराई सत्र में भी किसानों के लिए गन्ना पर्ची कम पड़ना तय है।
गन्ने पर किसानों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। किसान हर साल गन्ना रकबा में बढ़ोतरी कर रहे हैं तो अच्छी प्रजाति और मेहनत की वजह से पैदावार भी लगातार बढ़ रही है। इस साल कोरोना संक्रमण को हराने के लिए लगाए गए लॉक डाउन में किसानों ने गन्ना रकबे में और ज्यादा वृद्धि कर ली।
गन्ना रकबा किसानों ने 11.56 प्रतिशत बढ़ा दिया। जिस बिलाई चीनी मिल से गन्ना भुगतान इस साल में पूरा होने की कोई आस नहीं दिखती है, उसके क्षेत्र के किसानों ने भी रकबे में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर ली। पेराई शुरू करने से पहले चीनी मिल प्रशासन गन्ने की मांग के बारे में गन्ना विभाग को पत्र लिखता है।