हाईकोर्ट के आदेश पर भी गन्ना किसानों को बकाया भुगतान नहीं हो पा रहा है। आदेश के बाद भी मिलों ने बकाए का भुगतान नहीं किया है। भुगतान नहीं मिलने से किसानों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। इस मामले में कोर्ट अब 27 अगस्त को सुनवाई करेगी।
पेराई सत्र 2014-15 का गन्ना मूल्य बकाया भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। प्रदेश की शुगर मिलों पर करीब आठ हजार करोड़ रुपये बकाया है। मेरठ मंडल की 14 शुगर मिलों पर करीब 1100 करोड़ रुपये बकाया है। अभी तक सकौती और मोहिउद्दीनपुर मिल ही किसानों का पूरा भुगतान कर पाई है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 15 जुलाई तक बकाये का 75 फीसदी भुगतान कराने में असफल रहे शासन को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने सहकारी शुगर मिलों को दो सप्ताह के अंदर और निजी शुगर मिलों को तीन सप्ताह का समय दिया था। आगामी 27 अगस्त को कोर्ट में मामले की सुनवाई होनी है। लेकिन अभी तक आदेश के मुताबिक सहकारी और निजी क्षेत्र की बकाएदार मिलों ने भुगतान नहीं किया है।
क्या कहते हैं किसान नेता
कोर्ट का आदेश भी शुगर मिलों से भुगतान नहीं करा पा रहा है। शासन मिल मालिकों के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा है।
विनोद कलंजरी, प्रदेश उपाध्यक्ष भाकियू
भुगतान नहीं होने से किसान खून के आंसू रो रहे हैं। न तो बच्चों की फीस जा पा रही है और न ही बच्चों की शादी कर पा रहे हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियां किसान विरोधी है।
डॉ. राजकुमार सांगवान, संगठन प्रभारी, पश्चिमी यूपी रालोद
क्या कहते हैं अधिकारी
शुगर मिल लगातार भुगतान कर रही हैं। चीनी के रेट कम होने से भुगतान की स्पीड कम है। भुगतान में तेजी लाने के लिए विभागीय स्तर से दबाव बनाया जा रहा है।
विश्वेश कनौजिया, संयुक्त गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र