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मेरठ कॉलेज में प्रवेश नहीं होने पर हाईकोर्ट पहुंचा छात्र

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मेरठ।
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मेरठ कॉलेज में एलएलबी प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं मिलने पर छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट के जवाब मांगने पर विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कॉलेज ने नियमानुसार ही प्रवेश किए हैं। छात्र ने रजिस्ट्रेशन में एमएड के नंबर अंकित किए थे। एमएड एक वर्षीय कोर्स होने के कारण एलएलबी के लिए क्वालीफाइंग कोर्स नहीं है। इस कारण उसे मेरिट में शामिल नहीं किया गया था।
गढ़ रोड तरू कुंज निवासी अजीत सिंह ने हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में बताया कि उसने मेरठ कॉलेज में एलएलबी प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया था। मेरठ कॉलेज की दूसरी मेरिट 57 फीसदी अंकों पर रुकी, लेकिन उसका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। जबकि उसका मेरिट इंडेक्स 57.5 फीसदी था। कॉलेज और विवि प्रशासन से शिकायत के बाद भी उसका प्रवेश नहीं हो पाया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने विवि को मामले का निस्तारण करने के आदेश दिए थे।
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विवि प्रशासन का कहना है कि सारे तथ्यों की जांच के बाद सामने आया कि जो मार्कशीट अजीत सिंह ने रजिस्ट्रेशन में लगाई थी, वह एमएड की थी। उसके सर्वाधिक नंबर एमएड में ही थे। तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स के लिए एमएड क्वालीफाइंग कोर्स नहीं है। ऐसे में अजीत को इन नंबरों का वेटेज नहीं दिया गया। एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए स्नातक तीन वर्षीय या परास्नातक दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 45 फीसदी या इससे ज्यादा अंक होने चाहिए। छात्र को भी पूरे नियमों से अवगत करा दिया गया है।
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वेबसाइट पर देनी चाहिए थी सूचना
अजीत ने कहा कि एलएलबी के लिए जब एमएड कोर्स क्वालीफाइंग नहीं है तो इसकी सूचना वेबसाइट पर दी जानी चाहिए थी। कंपनी को सॉफ्टवेयर में बदलाव करना चाहिए। जब पीजी का एक वर्षीय कोर्स क्वालीफाइंग में नहीं आता है तो फार्म कंप्लीट नहीं होना चाहिए था।
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