सिसौली में स्थित किसान भवन
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा सरकार का असली चेहरा सामने आया
हरिद्वार से चलकर दिल्ली जा रही किसान क्रांति यात्रा में शामिल किसानों पर बर्बरता पूर्वक किए गए लाठीचार्ज, पथराव और पानी की बौछार किए जाने से सिसौली तथा आसपास के गांव के किसानों में रोष फैल गया। क्षेत्र के बाकी किसान भी यात्रा में शामिल होने के लिए दिल्ली जाने की तैयारी में लगे हैं। मंगलवार को किसान क्रांति यात्रा में शामिल किसानों पर लाठीचार्ज से किसानों में आक्रोश है। किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की है। भौराकलां के बुजुर्ग किसान रामपाल सिंह और महक सिंह का कहना है कि सरकार की इस कार्रवाई ने अंग्रेज सरकार की जलियावाला बाग कांड की याद दिला दी। सिसौली निवासी बलदेव सिंह, शैलेंद्र देशपाल और अभिजीत ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत से फोन पर वार्ता कर कहा कि किसानों को किसी कीमत पर पीछे नहीं हटना है। जब तक सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करती तब तक दिल्ली में डटे रहना है। किसानों के विकास का वादा कर सत्ता में आई भाजपा सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। किसान शांति पूर्वक अपना हक मांगने दिल्ली जा रहे थे। सरकार ने किसान और जवान को लड़ा दिया। सिसौली समेत आसपास के ग्रामों से किसान दिल्ली कूच की तैयारी में लगे हैं। कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, लौट कर नहीं आएंगे। अधिकांश किसान क्रांति यात्रा में जाने के कारण किसान भवन सुनसान है।
तरकश से निकले तीर
विपक्षी दलों के नेताओं ने हरिद्वार से दिल्ली की ओर शांतिपूर्ण ढंग से निकाली गई किसान क्रांति यात्रा पर लाठीचार्ज के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। विपक्षी दलों ने कहा कि किसानों पर बर्बर लाठीचार्ज कर सरकार को दोहरा चेहरा सामने आ गया है। भाजपा ने कहा कि इस मसले पर किसानों से वार्ता पहले होनी चाहिए थी।
निहत्थे किसानों को दिल्ली के किसान घाट पर क्यों नहीं जाने दिया गया। केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के हक की आवाज दबाना चाहती है। किसान अन्नदाता है, कोई आतंकवादी नहीं है। पूंजीपतियों ने सरकारों को कैप्चर कर लिया है।
- अजीत राठी, जिलाध्यक्ष रालोद।
केंद्र सरकार का किसान विरोधी चेहरा सामने आ गया है। किसानों की आय दोगुनी करने का दावा झूठा है। क्रांति यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जा रही थी। किसानों का उत्पीड़न, शोषण की सपा निंदा करती है।
- मुकेश चौधरी, पूर्व राज्यमंत्री, सपा।
केंद्र सरकार किसान विरोधी है। भाकियू ने क्रांति यात्रा का दस दिन पहले एजेंडा बता दिया था। फिर भी सीएम और पीएम ने चुप्पी साधे रखी। किसानों पर आंसू गैस, पानी की बौछार, पथराव के हमले की न्यायिक जांच कराई जाए। किसान घाट पर किसानों को जाने से प्रतिबंधित किया जाना घोर अन्याय है।
- हरेंद्र मलिक, पूर्व सांसद कांग्रेस।
दिल्ली के यूपी बॉर्डर पर किसानों के साथ किया गया बर्ताव निंदनीय है। रालोद का समर्थन किसानों के साथ है। केंद्र सरकार चार साल में किसानों के लिए कुछ नहीं कर पाई। ऐसी सरकार बर्खास्त होनी चाहिए।
- योगराज सिंह, पूर्व मंत्री रालोद।
किसान क्रांति यात्रा में टकराव के हालात बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों से वार्ता पहले होनी चाहिए थी। जिन किसानों को चोट लगी, घायल हुए, वो सभी हमारे भाई है। केंद्र सरकार ने मांगे मान ली है। किसान और गांव के हित को मोदी सरकार प्रतिबद्ध है।
- डॉ संजीव बालियान, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद।
सरकार की कोई मंशा किसानों के शोषण और उत्पीड़न की नहीं है। किसानों के हित में केंद्र और प्रदेश सरकार ने कई बड़े फैसले लिए है। टकराव और संघर्ष के हालात अचानक पैदा हुए, जिन्हें संभाल लिया गया।
- उमेश मलिक, भाजपा विधायक, बुढ़ाना।
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