जानकारी के अनुसार शुक्रवार तड़के घर के आंगन में सो रही मां के पास से 28 दिन पहले जन्मे दूधमुंहे बच्चे को कुत्तों ने खींच लिया। बच्चे के पास न होने का एहसास होने पर मां ने शोर मचा दिया लेकिन तब तक जंगली खूंखार कुत्ते उसे मौत के घाट उतार चुके थे।
मासूम की मौत पर जहां परिजनों में कोहराम मचा है वहीं ग्रामीणों में नगर निगम और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। ग्रामीणों के अनुसार जिले में आए दिन लोग कुत्तों के शिकार बन रहे हैं और प्रशासन खामोश बैठा है। जिला अस्पताल में रोजाना 40 से 45 लोग कुत्तों के हमले में घायल होकर पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन चिंता नहीं कर रहा है। नगर निगम भी बेपरवाह है।
मंगलवार को बेहट के गांव दयालपुर में मासूम को कुत्ते उठाकर ले गए और खेत में ले जाकर उसको मार डाला। इससे पहले भी जिले में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। घटनाओं के बाद प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई प्लान नहीं बनाया गया, जिससे खूंखार कुत्तों से छुटकारा मिल सके।
अब हालत यह है कि शहर के मंडी समिति रोड, खाता खेड़ी, नूर बस्ती, पुराना कलसिया रोड, नुमाइश कैंप, सुभाषनगर सहित विभिन्न इलाकों में कुत्तों का आतंक है। शहर के लोग कई बार नगर निगम से इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कुत्तों के आतंक से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
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