मेरठ। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) मेरठ यूनिट ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 साल से फरार दो लाख के इनामी कुख्यात बदमाश हरीश निवासी भौराखुर्द को मेरठ के भैसाली बस अड्डे के पास गिरफ्तार कर लिया। शातिर हरीश पर हत्या, लूट, रंगदारी, गैंगस्टर समेत 34 मुकदमे दर्ज हैं। मुजफ्फरनगर और शामली पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी।
एसटीएफ के प्रभारी एएसपी बृजेश सिंह ने बताया कि हरीश मुजफ्फरनगर जनपद के भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव भौराखुर्द का निवासी है। सोमवार दोपहर करीब 1:25 बजे एसटीएफ टीम को सूचना मिली थी कि दो लाख रुपये का इनामी बदमाश हरीश भैसाली बस स्टैंड के पास किसी से मिलने के लिए आ रहा है। इसके बाद टीम ने घेराबंदी शुरू कर दी। टीम ने देखकर हरीश ने भागने का प्रयास किया था, लेकिन टीम ने उसे दबोच लिया।
पूछताछ में उसने बताया कि 2006 से वह 2012 तक परिवार के साथ बुलंदशहर के शिकारपुर में मकान लेकर रह रहा था। पुलिस से बचने के लिए वह 2012 के बाद परिवार के साथ पंजाब के पटियाला शहर में में चला गया था। वहीं पर वह प्लोर मिल्स से आटा खरीदकर फुटकर दुकानों पर आटा बेचता था। सोमवार को भी वह मेरठ अपने परिचित से मिलने आया था, यहां से वह पटियाला जा रहा था। पूछताछ के बाद एसटीएफ ने उसे सोमवार देर शाम को मुजफ्फरनगर के भौराकलां थाना पुलिस के हवाले कर दिया। भौराकलां पुलिस उसे मंगलवार को कोर्ट में पेश करेंगी।
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भाई और पत्नी रहे गांव के प्रधान
- एसटीएफ की पूछताछ में हरीश ने बताया कि वर्ष 2004 में उसके भाई सतीश ने गांव के इंद्रपाल की हत्या कर दी थी। जिसमें वह जेल चला गया था। वर्ष 2006 में भाई सतीश ने जेल से आने के बाद प्रधानी का चुनाव लड़कर भौराखुर्द का ग्राम प्रधान बना था। लेकिन कुछ समय बाद ही भाई सतीश की विपक्षी लोगों ने हत्या कर दी गई थी। भाई की हत्या के बाद हरीश की पत्नी ने प्रधानी का चुनाव लड़ा था और जीत गई थी।
पारिवारिक रंजिश से बना कुख्यात, खूनी भौरा के नाम से बदनाम हुए गांव
भौराखुर्द निवासी हरीश(45) के परिवार का आपराधिक सफर 1992 से शुरू हआ। वर्ष 1994 में ट्यूबवैल पर एक व्यक्ति की हत्या हुई थी, जिसमे इन्द्रपाल ने इसके ताऊ चरण सिंह व सरदार सिंह, परिवारिक भाई संजीव व अजय कुमार को नामजद करा दिया था। इसके बाद भाई सतीश ने इन्द्रपाल पक्ष के रतन के भाई की हत्या कर दी थी, जिसमें भाई सतीश, अजय व संजीव, पिता ब्रहमपाल, चाचा विनोद व सतबीर जेल गए थे। वर्ष 1996 में इसका चाचा विनोद जमानत पर बाहर आ गया। इसके बाद इसके बाबा तिलकराम सिंह की हत्या इन्द्रपाल व रतन के लड़कों ने कर दी थी। इसकी सूचना थाने पर देकर इसके परिवार के लोग घर वापस आ रहे थे तो रास्ते में इन्द्रपाल व रतन पक्ष के लोगों ने इसके चाचा विनोद, जयपाल व जहान सिंह की हत्या कर दी थी। इसके छह साल बाद इसके भाई सतीश ने इन्द्रपाल की हत्या कर दी थी। एक परिवार से चली रंजिश में उसके घरवालों का झगड़ा हुआ और देखते-ही-देखते यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। गांव का नाम भी खूनी भौरा के नाम से बदनाम हो गया था।
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परिवार के सभी लोग मारे गए, भाई आदेश भी मुठभेड में मारा गया था
हरीश के परिवार के मां, बाप, भाई सभी मारे जा चुके हैं। हरीश के एक भाई आदेश की वर्ष 2019 में एसटीएफ से हुई मुठभेड़ में मृत्यु हो गई थी, जिस पर सवा लाख रुपये का पुरस्कार घोषित था।
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- एक-एक कर दर्ज हुए मुकदमे
हरीश पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, रंगदारी, अपहरण, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत 34 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली जिलों के थानों में दर्ज हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में वह 2012 से वह फरार चल रहा था। एसटीएफ प्रभारी के अनुसार डीजीपी की ओर से हरीश पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था। लंबे समय से वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय गैंग के लिए सिरदर्द बना हुआ था।