मेरठ। रोडवेज के रक्षाबंधन अभियान को शुरू होने से पहले ही झटके लगने शुरू हो गए हैं। बस संचालन स्टाफ ने बीमारी का बहाना बनाकर अवकाश पर जाना शुरू कर दिया है। यह हाल तब है जब विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए कर्मचारियों को इंसेंटिव देने की बात कही थी। वहीं कर्मचारी छह दिन के अभियान के लिए मिलने वाले 1200 रुपये को कम बता रहे हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते संचालन का खामियाजा यात्रियों को बसों में भीड़ के रूप में उठाना पड़ेगा।
रक्षाबंधन पर भाई-बहनों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रोडवेज का रक्षाबंधन अभियान आज से शुरू हो रहा है। यह रविवार तक चलेगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए रोडवेज ने बस संचालन व वर्कशाप स्टाफ की छुट्टी प्रतिबंधित की हुई है। वहीं अभियान के दौरान 1800 किलोमीटर बस संचालित करने वाले चालकों व परिचालकों को 1200 रुपये इंसेंटिव के रूप में दिए जाएंगे। वर्कशाप स्टाफ को भी इस अवधि में ड्यूटी करने पर 500 रुपये मिलेंगे, लेकिन स्टाफ ने इसे नाकाफी बताते हुए छुट्टी लेने की अर्जी लगानी शुरू कर दी है। कोई अपनी बीमारी का हवाला दे रहा है तो कोई परिजनों की।
स्टाफ है कम
विभाग में स्थायी चालकों व परिचालकों की बेहद कमी है। केवल 30 फीसदी स्टाफ ही नियमित है। बाकी 70 फीसदी स्टाफ संविदा का है। इसमें से भी शत प्रतिशत ड्यूटी पर नहीं आते। महीने में 22 दिन ड्यूटी करना अनिवार्य होने के बाद भी काफी स्टाफ तो बस नहीं मिलने पर डिपो में घूमकर ही वापस घर चला जाता है। अब त्योहार के दौरान शत प्रतिशत बसों को ऑन रोड करने के लिए सभी कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहने के आदेश दिए हैं, लेकिन डिपो में आ रहे छुट्टी के प्रार्थनापत्रों से अधिकारियों की नींद उड़ गई है। आरएम नीरज सक्सेना ने बताया कि अभियान के दौरान जो कर्मचारी नहीं आएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बसों में ज्यादा सफर करेंगी महिलाएं
प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन के दिन महिला यात्रियों को रोडवेज बसों में मुफ्त सफर करने की सौगात दी है। ट्रेनों में यह सौगात नहीं होने के चलते महिला यात्री रोडवेज बसों में ही सफर करना पसंद करेंगी। इसके चलते बसो में ज्यादा लोड रहेगा।