बताया गया कि तत्कालीन डीएम का तबादला होते ही एडीएम प्रशासन और तहसीलदार ने कब्जा करने वालों की तरफदारी करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से शासन में ऐसी रिपोर्ट भेज दी है, ताकि सरकार अपनी ही जमीन से कब्जा हटवाने के बारे में निर्देश देना तो दूर, सोचना ही छोड़ दे।
लेखपाल को जबरन छुट्टी पर भेजा
मामले में जिस लेखपाल ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे, अवैध खनन और स्टेडियम बनने की रिपोर्ट प्रशासन को दी थी, उसे जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है। मंशा तहकीकात को रोकने की है। लंबे समय वहां रहे लेखपाल को भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी है।
वोट बैंक देखते हुए जनप्रतिनिधि भी शांत
चारों गांवों का वोट बैंक देखते हुए जनप्रतिनिधि भी आगे नहीं आ रहे हैं। अभी हाल में हुई मुख्यमंत्री की वर्चुअल मीटिंग में एक जनप्रतिनिधि ने सरकारी जमीन पर कब्जे की बात उठाई थी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को कार्रवाई करने के लिए भी कहा था लेकिन सबने चुप्पी साध रखी है।
तहसील में आज होगी सुनवाई
एक अक्तूबर यानी बृहस्पतिवार को इस मामले की तहसील में सुनवाई होनी है। कब्जा करने वालों का दावा है कि जमीन के सारे दस्तावेज उनके पास हैं। करीब 50 साल से इस जमीन पर उनका कब्जा है। चकबंदी भी हो चुकी है। जसवंत शुगर मिल से उन्होंने जमीन खरीदी थी।
तीसरी मंजिल पर बननी थी ममटी, कर ली कवर
शहर के प्रमुख चौराहों में शामिल तेजगढ़ी में तीन मंजिला इमारत बनकर खड़ी हो गई लेकिन आवास विकास परिषद की नींद नहीं खुली। अमर उजाला में दो बार समाचार प्रकाशित होने के बाद सिर्फ नोटिस देने का खेल चलता रहा है और इसी बीच रात में तीसरे तल पर भी लिंटर डाल दिया गया।
अब इमारत को लेकर निशांत रावल द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत के जवाब में परिषद ने मान लिया है कि तीसरा तल नक्शे के विपरीत बना है। मेडिकल थाने में दी गई तहरीर पर अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
पोर्टल पर की गई शिकायत के जवाब में आवास विकास परिषद ने कहा कि तीसरी मंजिल पर सिर्फ ममटी बनाई जानी थी, लेकिन सेट बैक कवर करते हुए निर्माण किया गया है। परिषद इस मामले में अब भी झूठ बोल रहा है। सच यह है कि तीसरी मंजिल को पूरी तरह से कवर किया गया है।
वहीं, परिषद का कहना है कि इसके लिए निर्माणकर्ता को दो बार कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इसके अलावा 11 सितंबर को आवंटी के खिलाफ मेडिकल थाने में तहरीर और 18 सितंबर को ध्वस्तीकरण के आदेश भी किए जा चुके हैं।
तेजगढ़ी में स्वीकृत नक्शे से अधिक बना दी गई इमारत, पहले नजरअंदाज किया अब शमन का सुझाव दिया
अतिरिक्त निर्माण होने के समय आवास विकास के अधिकारी सोते रहे। अब आवंटी को शमन कराने का सुझाव दिया गया। पोर्टल पर जवाब में बताया गया है कि 26 सितंबर को आवंटी के अतिरिक्त नक्शे को शमन के लिए भेजा गया है।
सवाल यह है कि तीसरी मंजिल को पूरा कवर करने के बाद क्या नियमों में शमन का प्रावधान है? वहीं, दूसरी तरफ अधिकारी कहते हैं कि 45 मीटर की सड़क पर आवासीय भवन में तीसरी मंजिल बनाने की अनुमति अभी तक तो नहीं है।