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मेरठ: सरकारी जमीन पर बनाया स्टेडियम, हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद अवैध कब्जे हटवाने में नाकाम प्रशासन

Thu, 01 Oct 2020 05:38 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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sports stadium - फोटो : amar ujala
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एक तरफ मेरठ जिले में खेल विश्वविद्यालय का मामला अधर में लटका हुआ है, वहीं नजूल की बेशकीमती जमीन पर काबिज होकर कुछ लोगों ने निजी तौर पर स्टेडियम का निर्माण कर लिया है। अफसरों की शह पर यहां अवैध खनन भी बेरोकटोक हो रहा है। 

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 दूसरी ओर हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद प्रशासन और पुलिस कब्जे को हटाने की जहमत नहीं उठा रहा है। अधिकारी कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा जताकर सरकार को लगातार अंधेरे में रख रहे हैं। जमीन मोहकमपुर, पूठा, मलियाना और कुंडा गांव में है। 

परतापुर इंटरचेंज पर अरबों की लागत से प्रदेश व केंद्र सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं। आने वाले दिनों में शुरू होने जा रही रैपिड रेल, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और गंगा एक्सप्रेसवे से जनपद की सूरत बदलेगी। इससे परतापुर और उसके आसपास के इलाके की जमीन की कीमतें बढ़ सकती हैं। अधिकारी इसे बखूबी जानते हैं और सरकारी जमीनों पर कब्जे न हटवा कर अपने स्वार्थ साधना चाहते हैं।
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वर्तमान में इसी कृषि भूमि पर स्टेडियम ही नहीं बना दिया गया है, इससे कमाई भी शुरू कर दी गई है। स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के लिए 500 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस और फिर एक हजार रुपये महीना लिया जा रहा है।

बताया गया कि तत्कालीन डीएम का तबादला होते ही एडीएम प्रशासन और तहसीलदार ने कब्जा करने वालों की तरफदारी करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से शासन में ऐसी रिपोर्ट भेज दी है, ताकि सरकार अपनी ही जमीन से कब्जा हटवाने के बारे में निर्देश देना तो दूर, सोचना ही छोड़ दे। 

लेखपाल को जबरन छुट्टी पर भेजा 
मामले में जिस लेखपाल ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे, अवैध खनन और स्टेडियम बनने की रिपोर्ट प्रशासन को दी थी, उसे जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है। मंशा तहकीकात को रोकने की है। लंबे समय वहां रहे लेखपाल को भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी है।  

वोट बैंक देखते हुए जनप्रतिनिधि भी शांत 
चारों गांवों का वोट बैंक देखते हुए जनप्रतिनिधि भी आगे नहीं आ रहे हैं। अभी हाल में हुई मुख्यमंत्री की वर्चुअल मीटिंग में एक जनप्रतिनिधि ने सरकारी जमीन पर कब्जे की बात उठाई थी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को कार्रवाई करने के लिए भी कहा था लेकिन सबने चुप्पी साध रखी है। 

तहसील में आज होगी सुनवाई
एक अक्तूबर यानी बृहस्पतिवार को इस मामले की तहसील में सुनवाई होनी है। कब्जा करने वालों का दावा है कि जमीन के सारे दस्तावेज उनके पास हैं। करीब 50 साल से इस जमीन पर उनका कब्जा है। चकबंदी भी हो चुकी है। जसवंत शुगर मिल से उन्होंने जमीन खरीदी थी।
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तीसरी मंजिल पर बननी थी ममटी, कर ली कवर
शहर के प्रमुख चौराहों में शामिल तेजगढ़ी में तीन मंजिला इमारत बनकर खड़ी हो गई लेकिन आवास विकास परिषद की नींद नहीं खुली। अमर उजाला में दो बार समाचार प्रकाशित होने के बाद सिर्फ नोटिस देने का खेल चलता रहा है और इसी बीच रात में तीसरे तल पर भी लिंटर डाल दिया गया।

अब इमारत को लेकर निशांत रावल द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत के जवाब में परिषद ने मान लिया है कि तीसरा तल नक्शे के विपरीत बना है। मेडिकल थाने में दी गई तहरीर पर अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया है।  

पोर्टल पर की गई शिकायत के जवाब में आवास विकास परिषद ने कहा कि तीसरी मंजिल पर सिर्फ ममटी बनाई जानी थी, लेकिन सेट बैक कवर करते हुए निर्माण किया गया है। परिषद इस मामले में अब भी झूठ बोल रहा है। सच यह है कि तीसरी मंजिल को पूरी तरह से कवर किया गया है।

वहीं, परिषद का कहना है कि इसके लिए निर्माणकर्ता को दो बार कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इसके अलावा 11 सितंबर को आवंटी के खिलाफ मेडिकल थाने में तहरीर और 18 सितंबर को ध्वस्तीकरण के आदेश भी किए जा चुके हैं।  

तेजगढ़ी में स्वीकृत नक्शे से अधिक बना दी गई इमारत, पहले नजरअंदाज किया अब शमन का सुझाव दिया
अतिरिक्त निर्माण होने के समय आवास विकास के अधिकारी सोते रहे। अब आवंटी को शमन कराने का सुझाव दिया गया। पोर्टल पर जवाब में बताया गया है कि 26 सितंबर को आवंटी के अतिरिक्त नक्शे को शमन के लिए भेजा गया है।

सवाल यह है कि तीसरी मंजिल को पूरा कवर करने के बाद क्या नियमों में शमन का प्रावधान है? वहीं, दूसरी तरफ अधिकारी कहते हैं कि 45 मीटर की सड़क पर आवासीय भवन में तीसरी मंजिल बनाने की अनुमति अभी तक तो नहीं है।
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