फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेल दिवस विशेष: मेजर ध्यानचंद ने मुजफ्फरनगर के इस मैदान पर दिखाया था हॉकी का जादू

Thu, 29 Aug 2019 02:54 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
मेजर ध्यानचंद
विज्ञापन
हॉकी के जादूगर के नाम से विख्यात मेजर ध्यानचंद जिले के मंसूरपुर में हॉकी टूर्नामेंट में खेलने के लिए आए थे। एक समय था, जब जिले में हॉकी का खेल नंबर एक पर था। डीएवी डिग्री कॉलेज में हॉकी की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होती थी। धीरे-धीरे हालात यह बने कि जिले में हॉकी अस्तप्राय हो गया है। न अच्छे कोच रहे और न ही विद्यालयों में खेल का माहौल रहा है। 
विज्ञापन


हॉकी के खेल में मुजफ्फरनगर जिले की एक अलग पहचान रही है। यहां देश के बड़े टूर्नामेंट होते रहे हैं। 1956 में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद मंसूरपुर चीनी मिल में आयोजित टूर्नामेंट में खेलने के लिए आए थे। जिले में बड़ी संख्या में लोग हॉकी खेलते थे। जिले की प्राचीन शिक्षण संस्था डीएवी कॉलेज में जगमोहन मेमोरियल हॉकी टूर्नामेंट होता था, जिसमें देश भर की हॉकी की टीम खेलने आती थी।

यह सिलसिला डीएवी कॉलेज में 1983 तक चला। कॉलेज के स्पोर्ट्र्स अधिकारी विष्णु राजकुमार उर्फ बच्चू भैया हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे। अब परिस्थितियां बदल गई है, जिले में हॉकी के टूर्नामेंट बंद हो गए हैं। स्पोट्रर्स स्टेडियम में अच्छे कोच नहीं हैं। कॉलेजों में हॉकी की तरफ खिलाडियों का रुझान सिमटता जा रहा है। जहां छात्र हैं, वहां सिखाने वाले नहीं हैं। 

यह भी पढ़ें: मेरठ: लावड़ में महिलाओं ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, वर्दी फाड़ी, एसओ समेत कई घायल

हॉकी से लंबे समय से जुड़े रमेशचंद कहते हैं कि जिले में खिलाड़ियों की कमी नहीं है, एक माहौल बनाने की जरूरत है। डीएवी कॉलेज के समाजशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. कलम सिंह कहते हैं कि एक समय था, जब डीएवी कॉलेज की पहचान पूरे देश में हॉकी के टूर्नामेंट से होती थी।
विज्ञापन

खिलाड़ियों में उत्साह बना रहता था। नए खिलाड़ी मैदान में जूझते रहते थे। कॉलेज की प्रबंध समिति से जुड़े कृष्ण गोपाल रईस कहते हैं कि लंबे समय तक कॉलेज में जगमोहन मेमोरियल टूर्नामेंट हुए, बाद में खर्च बढ़ने के कारण आयोजन रोका गया। 

खिलाडिय़ों को सुविधाओं का अभाव
एमसीए के सचिव एवं क्रिकेट अंपायर मनोज पुंडीर कहते हैं कि खेलों को लेकर सरकार घोषणाएं तो लगातार कर रही है, लेकिन यथार्थ में खिलाड़ियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अच्छे कोच का अभाव है। जब तक अच्छे कोच नहीं होंगे खिलाड़ी नहीं निकल पाएंगे। जो खिलाड़ी सामने आ रहे हैं, इनकी अपनी मेहनत है। कुछ नई योजनाएं सरकार की आ रही है, हो सकता है, इनसे कोई लाभ हो। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें