यह सिलसिला डीएवी कॉलेज में 1983 तक चला। कॉलेज के स्पोर्ट्र्स अधिकारी विष्णु राजकुमार उर्फ बच्चू भैया हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे। अब परिस्थितियां बदल गई है, जिले में हॉकी के टूर्नामेंट बंद हो गए हैं। स्पोट्रर्स स्टेडियम में अच्छे कोच नहीं हैं। कॉलेजों में हॉकी की तरफ खिलाडियों का रुझान सिमटता जा रहा है। जहां छात्र हैं, वहां सिखाने वाले नहीं हैं।
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हॉकी से लंबे समय से जुड़े रमेशचंद कहते हैं कि जिले में खिलाड़ियों की कमी नहीं है, एक माहौल बनाने की जरूरत है। डीएवी कॉलेज के समाजशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. कलम सिंह कहते हैं कि एक समय था, जब डीएवी कॉलेज की पहचान पूरे देश में हॉकी के टूर्नामेंट से होती थी।
खिलाड़ियों में उत्साह बना रहता था। नए खिलाड़ी मैदान में जूझते रहते थे। कॉलेज की प्रबंध समिति से जुड़े कृष्ण गोपाल रईस कहते हैं कि लंबे समय तक कॉलेज में जगमोहन मेमोरियल टूर्नामेंट हुए, बाद में खर्च बढ़ने के कारण आयोजन रोका गया।
खिलाडिय़ों को सुविधाओं का अभाव
एमसीए के सचिव एवं क्रिकेट अंपायर मनोज पुंडीर कहते हैं कि खेलों को लेकर सरकार घोषणाएं तो लगातार कर रही है, लेकिन यथार्थ में खिलाड़ियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अच्छे कोच का अभाव है। जब तक अच्छे कोच नहीं होंगे खिलाड़ी नहीं निकल पाएंगे। जो खिलाड़ी सामने आ रहे हैं, इनकी अपनी मेहनत है। कुछ नई योजनाएं सरकार की आ रही है, हो सकता है, इनसे कोई लाभ हो।