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मेरठ में सपा का नया समीकरण: 17 साल बाद गुर्जर नेता को जिलाध्यक्ष की कमान, कर्मवीर गुमी का जोरदार स्वागत

Wed, 15 Oct 2025 12:10 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में समाजवादी पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। 17 साल बाद गुर्जर समाज से कर्मवीर सिंह गुमी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, पूर्व जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

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सपा जिलाध्यक्ष का मेरठ पहुंचने पर जोरदार स्वागत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में समाजवादी पार्टी ने जिले में नया संगठनात्मक संतुलन साधते हुए 17 साल बाद गुर्जर समाज से कर्मवीर सिंह गुमी को जिलाध्यक्ष बनाया है। मंगलवार को लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने उन्हें मनोनयन पत्र सौंपा।

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे स्थित काशी टोल प्लाजा पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। सुबह से ही बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता फूल-मालाएं लेकर पहुंच गए थे। गुमी ने कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे और 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य को पूरा करेंगे।

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सपा ने जिलाध्यक्ष पद पर इस बार गुर्जर कार्ड खेला है। नया जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी को बनाया गया है। वह परतापुर क्षेत्र के गांव गुमी के रहने वाले हैं। लंबे समय से सपा से जुड़े हुुए हैं। मंगलवार को लखनऊ में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने जिलाध्यक्ष मनोनीत किए जाने का पत्र दिया। 

मेरठ में सपा ने करीब 17 साल बाद गुर्जर जाति के किसी व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाया है। साल-2008 में आखिरी बार ओपी राणा जिलाध्यक्ष थे। इसके बाद से जाट ही जिलाध्यक्ष बनते रहे। साल-2008 में ही जयवीर सिंह को जिलाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद राजपाल सिंह जिलाध्यक्ष बने, फिर जयवीर सिंह और उसके बाद राजपाल सिंह। पिछले करीब दो साल चार माह से विपिन चौधरी जिलाध्यक्ष थे। उन्हें 14 जून 2023 को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। विपिन चौधरी को अब राज्य कार्यकारिणी में प्रदेश सचिव बनाया गया है। 

 

हालांकि जिलाध्यक्ष पद से हटाए जाने से विपिन चौधरी के समर्थकों को झटका लगा है। कर्मवीर सिंह गुमी 1972 से राजनीति में हैं। उस वक्त वह भारतीय किसान दल (बीकेडी) से जुड़े थे। सपा बनने के बाद सपा में शामिल हो गए।

हालांकि 2006-07 में बसपा का दामन थामा। 2008 में बसपा छोड़कर फिर से सपाई हो गए। पिछले लोकसभा चुनाव में उनके सपा से टिकट मिलने की भी खूब चर्चा रही। हालांकि टिकट उन्हें नहीं मिला। कर्मवीर गुमी का कहना है कि जो जिम्मेदारी उन्हें मिली है, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे। सभी को साथ लेकर पार्टी को आगे बढ़ाएंगे। 2027 का चुनाव जीतकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाएंगे। वहीं, विपिन चौधरी का कहना है कि जिलाध्यक्ष से हटाना पार्टी हाईकमान का निर्णय है। इसमें वह कुछ नहीं कह सकते। उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई है जिसके जरिए वह पार्टी को और मजबूत करने का काम करेंगे। 
 

नेताओं को चोर कहना पड़ गया भारी मई में ही शुरू हो गई थी उल्टी गिनती 
सपा नेता विपिन चौधरी को जिलाध्यक्ष पद से हटाए जाने की उल्टी गिनती इस साल मई माह में ही शुरू हो गई थी। दरअसल, 28 मई को उन्होंने पार्टी कार्यालय पर हुई समीक्षा बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए चोर शब्द का इस्तेमाल किया था। कहा था कि कद्दावर नेता बैठक में नहीं आते। राष्ट्रीय अध्यक्ष आएंगे तो उन्हें चेहरा दिखाने के लिए आ जाएंगे। 

उनके निशाने पर तीनों विधायक शाहिद मंजूर, रफीक अंसारी और अतुल प्रधान थे। इनके अलावा इस बैठक में न आने वाले मुकेश सिद्धार्थ, योगेश वर्मा, प्रभुदयाल वाल्मीकि, सम्राट मलिक और बाबर खरदौनी भी उन्होंने निशाना साधा था। 
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तब से ही तीनों विधायक उनसे नाराज थे। हालांकि अगले दिन उन्होंने इसकी भरपाई करने की कोशिश की थी और तीनों विधायकों को कोहिनूर कहा था। इस समीक्षा बैठक में पूर्व मंत्री जुगल किशोर वाल्मीकि आए हुए थे। उन्हीं के सामने विपिन चौधरी ने यह कहा था जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।  

पार्टी का निर्णय है। जिलाध्यक्ष बदले हुए काफी दिन हो गए थे। बदलाव होता रहता है। - शाहिद मंजूर, विधायक किठौर 
पार्टी ने कुछ सोचकर ही बदलाव किया होगा। वह जिम्मेदारी से काम करेंगे।  - रफीक अंसारी, विधायक
नए जिलाध्यक्ष को बधाई। पार्टी को मजबूत करने के लिए परिवर्तन होते रहते हैं।  -अतुल प्रधान, विधायक 
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