आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों ने बेहतर सेवा और कम ब्याज दरों का भरोसा देकर खाता फिर से अपने बैंक में ट्रांसफर कराया। लेकिन खाता ट्रांसफर होते ही कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अवैध चार्ज वसूले जाने लगे।
नितिन कुमार ने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों संदीप कुमार, विवेक कौशिक, अभिषेक जैन, रजत अरोड़ा और रीजनल मैनेजर राजेश खरे ने कई बार झूठे वादे कर ब्याज और चार्ज वापस करने का भरोसा दिलाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
कंपनी से काउंटर बैंक गारंटी के नाम पर 11 लाख रुपये लिए गए, जिन्हें लौटाने से इनकार कर दिया गया। इतना ही नहीं, कंपनी ने जब दूसरे बैंक से लोन मंजूर कराया तो जानबूझकर अकाउंट ट्रांसफर में बाधा डाली गई। आरोप है कि कंपनी द्वारा दिए गए 3.50 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट को बैंक ने 10 दिन तक रिसीव नहीं किया और बाद में 2.78 करोड़ की रकम लौटाते हुए शेष रकम से अवैध चार्ज काट लिए।
पीड़ित ने इस मामले की शिकायत थाना सदर बाजार और एसएसपी से भी की, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अब पांच अधिकारियों पूर्व मैनेजर संदीप कुमार, विवेक कौशिक, मौजूदा मैनेजर अभिषेक जैन, लोन अधिकारी रजत अरोड़ा और रीजनल मैनेजर राजेश खरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।