सदर दुर्गाबाड़ी स्थित दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में धर्म सभा का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी स्थित भगवान पारसनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि दुखों को अभिव्यक्त करने से मन हल्का हो जाता है जबकि सुख को अधिक अभिव्यक्त करने से नजर लगने की आशंका रहती है। जिस प्रकार व्यक्ति डॉक्टर के सामने अपनी बीमारी खुलकर बताता है। उसी प्रकार भगवान के समक्ष अपने दुखों को सही तरीके से व्यक्त करने पर मन को शांति मिलती है और व्यक्ति दुखों से पार पाने का मार्ग खोज पाता है।
आचार्य ने कहा कि जीवन में सुख और दुख स्थायी नहीं हैं। दुख के बाद सुख आता है। इसलिए दुख आने पर निराश नहीं होना चाहिए। बल्कि उसे पहचानना चाहिए। दुख मनुष्य को जगाता है जबकि सुख उसे सुला देता है। दुखी व्यक्ति परमात्मा का ध्यान करता है। मेहनत करता है और अच्छे कर्मों की ओर बढ़ता है, जबकि सुखी व्यक्ति कई बार अहंकार में पड़ जाता है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में आने पर श्रद्धालुओं को तीर्थंकर भगवान के 32 गुणों का स्मरण कर उनकी आराधना करनी चाहिए। अच्छे कार्य का श्रेय स्वयं लेने के बजाय दूसरों को देना चाहिए। यदि कोई गलत कार्य हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। इससे समाज में व्यक्ति का सम्मान और विश्वास बढ़ता है। आचार्य ने कहा कि मंदिर जाने की बात छिपाने की जरूरत नहीं है लेकिन यदि कोई व्यक्ति गलत कार्य करने जा रहा हो तो उसे उसके बारे में लोगों को बताकर जाना शुरू कर देना चाहिए।