एसएसपी के निर्देश पर थानों में थाना प्रभारियों की मर्जी से चल रही एसओजी की टीमों को आज तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि एसओजी की टीम सिर्फ एसएसपी एवं एसपी सिटी एवं एसपी क्राइम के अधीन ही कार्य करेंगी।
इसके बाद से अब थाना स्तर पर थाना प्रभारियों के जो चहेते सिपाही एसओजी के नाम पर लूट कर रहे थे और कहीं भी ड्यूटी नहीं कर रहे थे अब उन सबको नियमानुसार ड्यूटी करनी पड़ेगी। इस आदेश के बाद नौचंदी थाने में एसओजी के नाम पर आधा दर्जन से अधिक जो सिपाही मौज काट रहे थे उनके चेहरे आज उतरे हुए दिख रहे हैं।
एसओजी के नाम पर इन सिपाहियों के साथ करीब इतने ही मुखबिर इस काम में लगे थे स्थिति यह हो गई थी की थाने की हवालात में किसी भी आरोपी को ना रख कर थाने के पिछले हिस्से में ऊपर बने कमरे में रखा जाता था और वहीं से सारे लेनदेन होते थे। थाने पर तैनात अन्य पुलिसकर्मियों के चेहरे पर इस बात की खुशी है कि अब इन सिपाहियों की इतनी मर्जी नहीं चल पाएगी।
बता दें कि मेरठ पुलिस की शरद गोस्वामी वाले मामले में ऐसे ही कथित एसओजी के विपिन भाटी एवं कामिल की वजह से काफी किरकिरी हो चुकी है। बताते हैं की नौचंदी थाने की कथित एसओजी के आधा दर्जन से अधिक सिपाहियों की भी निरंतर शिकायतें मिल रही थीं।
एसएसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि मेरठ जिले में सभी एडिशनल एसपी, सभी सीओ और सभी थानों की क्राइम ब्रांच भंग की गई है। सभी टीमों को लाइन हाजिर किया गया है। उन्होंने बताया कि डीजीपी सर्कुलर के हिसाब से जनपद में केवल एक एसओजी, स्वाट और सर्विलांस टीम होती है।