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सियासत के आगे नतमस्तक नौ लालबत्ती

Mon, 07 Sep 2015 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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सियासत के आगे नौ लालबत्तियां नतमस्तक हो चुकी हैं। समाजवादी सरकार के कैबिनेट या दर्जा प्राप्त मंत्री हों या फिर किसी विभाग के सलाहकार। स्मार्ट सिटी के लिए मुख्यमंत्री से की जा रही लचर पैरवी से साफ हो चुका है कि उनमें कितना दम है। जनता की भावनाओं से विशुद्ध तरीके से सियासत हो रही है। मंशा साफ नहीं है इसलिए लंबे-चौड़े दावों और बयानों से गुमराह कर जनता को बरगलाया जा रहा है।
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आजादी के मतवालों के इस शहर की यह अनदेखी स्थानीय नेता एवं जनप्रतिनिधि ही नहीं बल्कि राज्य और केंद्र सरकार भी कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ के साथ रायबरेली का नाम स्मार्ट सिटी के लिए जोड़कर नये विवाद को जन्म दिया। जिससे साबित हो रहा है कि सरकार जनहित में नहीं बल्कि अपने हित में क्रांतिधरा के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं।

लालबत्ती में बुझी स्मार्ट सिटी की लौ
मेरठ। शहर की सड़कों पर शोर मचाकर लालबत्ती लगी गाड़ियों में सत्ता के ओहदेदार शान से घूम रहे हैं। इनका कद इतना बौना हो चुका है कि मुख्यमंत्री के सामने मेरठ का पक्ष रखने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे तो नेताजी के सामने भी नतमस्तक हैं। अपनी पहुंच से लालबत्ती तो पा ली, लेकिन जनता की बेहद मांग यानी स्मार्ट सिटी की उम्मीद की लौ इसी लालबत्ती में बुझ चुकी है। वैसे भी लालबत्ती वाले ये ओहदेदार जब अपने शहर की आवाज को मुख्यमंत्री के दरबार तक नहीं पहुंचा सकते तो वह आम जनता के सच्चे सेवक कैसे साबित हो सकते हैं।
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इसकी सच्चाई सपा के इन लालबत्ती वाले नेताओं की पहुंच बता रही है। स्मार्ट सिटी को लेकर सपा के ये स्थानीय नेता रोजाना बयानबाजी करके मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह से बात करने के दावे ठोक रहे हैँ। लेकिन सच्चाई यह है कि  एक माह बीतने के बाद भी सपा नेता अखिलेश यादव और मुलायम सिंह को मेरठ की जनता की इस जायज मांग से अवगत करा पाए हैं। जिसका जीता जागता सबूत यह है कि कुछ सपा नेता स्वीकार कर चुके हैं कि अभी तक मुख्यमंत्री और सपा मुखिया से मुलाकात नहीं हुई है।

अगर मान भी लें कि कुछ मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के सामने मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव रखा तो अभी तक मुख्यमंत्री ने मेरठ स्मार्ट सिटी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया क्यों व्यक्त नहीं की। जबकि इस दौरान में छोटे से छोटे मामलों पर मुख्यमंत्री, सपा मुखिया और नगर विकास मंत्री आजम खां बयान देते हैं।

मेरठ है हकदार, यह किंतु परंतु क्यों
स्मार्ट सिटी के लिए मेरठ हकदार है। इस शहर की भौगोलिक स्थिति, नगर निगम के संसाधन, राजस्व, उद्योग धंधे, मेडिकल कॉलेज, विवि, जेएनएनयूआरएम योजना, ऐतिहासिकता और तमाम उपलब्धियों के आगे रायबरेली कहीं नहीं ठहरता। 

अगर प्रदेश सरकार मेरठ के साथ सौतेला व्यवहार नहीं कर रही है तो फिर क्यों नहीं प्राथमिकता के आधार पर मेरठ का नाम स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने की घोषणा करती। आगामी 15 सितंबर को लखनऊ में होने वाली समिति की बैठक पर भी सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं। अभी तक मेरठ के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अगर 15 सितंबर को बैठक में राज्य सरकार ने मेरठ की उपलब्धियों को नजरअंदाज करके रायबरेली का नाम प्रस्तुत किया तो स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार मेरठ की जनता से खुला धोखा कर रही है। जिसका बदला मेरठ की जनता भी आगामी चुनावों में लेगी।  

तो क्या फर्जी थी 29 को जारी सूची
स्मार्ट सिटी मिशन में उप्र के 13 शहरों के चयन के लिए 29 जुलाई को केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की कमेटी ने लखनऊ में प्रजेंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसमें उप्र के 14 शहरों से महापौर, नगरायुक्त, पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारियों ने अपने-अपने शहर की उपलब्धियां गिनायी थीं। प्रजेंटेशन में समिति ने प्रत्येक शहर को उनके कार्य के आधार पर अंक दिए थे।

उसी दिन शाम को मीडिया और शासन को जारी विज्ञप्ति में मेरठ को 75 अंक देकर 13वें स्थान पर रखा था। जिसको मीडिया ने प्राथमिकता पर प्रकाशित भी किया था। लेकिन रातोंरात स्मार्ट सिटी की सूची से छेड़छाड़ करके मेरठ के साथ विवाद पैदा करते हुए रायबरेली के अंक भी 75 दर्शा दिए। इतना ही नहीं, मेरठ से पहले यानी रायरेली को 13 ए और मेरठ को 13 बी स्थान दिया गया। यानी प्रदेश सरकार ने 30 जुलाई को मेरठ के साथ सौतेला व्यवहार करने की नीव रख दी। साबित कर दिया कि सपा को मेरठ की जनता से कोई लेना-देना नहीं है।

स्मार्ट शहरों की पहली सूची बनेगी न्यायालय में आधार
उत्तर प्रदेश के सभी 13 स्मार्ट सिटी के लिए चयनित शहरों की पहली सूची जो 29 जुलाई को जारी की गई थी। वही, मेरठ को न्याय दिलाएगी। क्योंकि मेरठ की जनता ने अपने अधिकार के लिए हाईकोेर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। मेरठ की जनता को न्यायालय से न्याय की उम्मीदें हैं। हालांकि सूचनाएं मिल रहीं हैं कि राज्य सरकार को न्यायालय का भय सता रहा है। इसीलिए आगामी 15 सितंबर को अधिकारियों की समिति बैठक करेगी।
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