मेरठ स्मार्ट सिटी में शामिल होगा या नहीं इसका पता सोमवार को चल जाएगा। माना जा रहा है कि अगर सोमवार को लखनऊ में होने वाली बैठक में शामिल अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी मिशन के बिंदुओं पर मेरठ का रिकॉर्ड देखा तो हर कीमत पर मेरठ ही स्मार्ट सिटी बनेगा।
नगर निगम मेरठ 85 अंकों का दावा कर रहा है। वैसे भी मेरठ के सामने रायबरेली कहीं ठहरता ही नहीं है। अगर स्मार्ट सिटी पर राजनीति नहीं हुई तो मेरठ को हक मिलना तय है।
29 जुलाई को लखनऊ में केंद्र सरकार की टीम और राज्य सरकार के नगर विकास सचिव एवं अन्य अधिकारियों द्वारा उप्र के 14 शहरों की परीक्षा में मेरठ पास हो गया था। मानकों की प्रजेंटेशन में मेरठ को 80 अंक मिले थे, लेकिन पांच अंक जलकल विभाग में अधिक व्यय पर काट दिए गए।
फिर भी 29 जुलाई को शाम के समय जारी सूची में मेरठ का नाम उप्र के स्मार्ट शहरों की सूची में 13वें स्थान पर रखा गया था। रातोंरात मेरठ के साथ राजनीति हो गई और अगले ही दिन मेरठ के साथ रायबरेली को 13ए के स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया गया था।
उसी दिन से मेरठ नगर निगम प्रशासन ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि और मेरठ की जनता स्मार्ट सिटी की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। इस दौरान जहां भाजपाइयों ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू के सामने मेरठ का पक्ष रखा है। वहीं सपाइयों ने मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों के सामने मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने की मांग रखी।
शहर का व्यापारी, छात्र, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। व्यापारियों ने एक दिन बाजार भी बंद रखे।
मेरठ के सामने नहीं टिकता रायबरेली
मेरठ के सामने रायबरेली किसी भी स्तर पर नहीं ठहरता है। अगर जनता हित में संसाधनों की बात करें तो रायबरेली से मेरठ काफी आगे है। मेरठ एनसीआर का सबसे बड़ा शहर ही नहीं बल्कि सबसे पुरानी कमिश्नरी है। जबकि रायबरेली छोटा शहर होने के साथ आबादी में भी काफी पीछे है।
मेरठ को पश्चिम उप्र की राजधानी के नाम से जाना जाता है। देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान वाली क्रांतिधरा है। जबकि रायबरेली का ऐसा इतिहास नहीं है। मेरठ नगर निगम है जबकि रायबरेली नगर पालिका है।
मेरठ नगर निगम के पास सफाई, पानी और निर्माण के संसाधनों की भरमार है। जेएनएनयूआरएम योजना से गंगाजल भी मिलने वाला है। जबकि रायबरेली नगर पालिका है। अन्य संशासन भी शून्य स्तर पर हैं। मेरठ नगर निगम का वार्षिक राजस्व 100 करोड़ से अधिक है। जबकि रायबरेली का राजस्व आधा ही है।
मेरठ एजुकेशनल हब है, यहां दो सरकारी और दो प्राइवेट विवि हैं। एक सरकारी और एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, 60 से अधिक व्यवसायिक शिक्षण संस्थान हैं।
मेरठ शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के बिंदू ग्रीन बेल्ट के लिए भूमि उपलब्ध हैं। मेरठ में मेट्रो का कार्य शुरू हो चुका है। रायबरेली के लिए मेट्रो एक सपना है।मेरठ में जेएनएनयूआरएम योजना से महानगर बस सेवा संचालित है।
गंगाजल भी मिलने वाला है। सीवर का कार्य भी 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। कूड़ा निस्तारण राज्य सरकार स्तर पर अटका है। वह भी शीघ्र होने वाला है।
अगर सोमवार को लखनऊ बैठक में मेरठ के साथ राजनीति नहीं हुई। यानी स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े बिंदुओं के अनुरूप मेरठ का आंकलन किया गया तो मेरठ को स्मार्ट सिटी बननेे से कोई नहीं रोक पाएगा। क्योंकि मेरठ के सामने रायबरेली कहीं नहीं टिकता है। हमने अपना पक्ष केंद्र और राज्य सरकार के सामने पत्रों के माध्यम से रख दिया है। सोमवार को फिर से बैठक में रखेंगे।
-हरिकांत अहलुवालिया, महापौर