गंगा एक्सप्रेसवे : धीमी पड़ी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया
मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे के लिए चल रही जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। वित्तीय वर्ष 2020 के अंतिम दिन मेरठ को 100 करोड़ रुपये मिले थे, इनमें से 99 करोड़ 38 लाख 38 हजार 137 रुपये किसानों के खाते में डाल दिए गए हैं। पैसा न होने के कारण तीन दिन बाद शुक्रवार को दो बैनामे हुए। प्रशासन की ओर से चार करोड़ का मुआवजा दिया गया।
यूपीडा की ओर से जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया की साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही है। 14 जून तक की रिपोर्ट में मेरठ में 181 हेक्टेयर कुल भूमि में से 101 हेक्टेयर भूमि ली जा चुकी है। अभी तक 55 फीसदी ही कार्य हुआ है। अभी 82 हेक्टेयर भूमि का और अधिग्रहण होना है। सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री लगातार इस प्रोजेक्ट की खुद समीक्षा कर रहे हैं, जिससे पूर्वांचल एक्सप्रेस के लोकार्पण के समय गंगा एक्सप्रेसवे के कार्य का शिलान्यास किया जा सके। शिलान्यास की प्रस्तावित तिथि अक्तूबर-नवंबर तय की गई है।
किसानों को देने है 275 करोड़
मेरठ के नौ गांवों के 546 किसानों से जमीन ली जानी है। इसके एवज में 275 करोड़ 85 लाख 82 हजार 937 रुपये दिए जाने हैं। इसके अतिरिक्त स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का भार भी सरकार को उठाना है।
ये दिया मुआवजा
18 जून - चार करोड़ 30 लाख 38 हजार 400
14 जून - 27 करोड़ 84 लाख 78 हजार 734
10 जून - 15 करोड़ 43 लाख 39 हजार 964
नौ जून - छह करोड़ 16 लाख 98 हजार 730
आठ जून - 15 करोड़ 67 लाख पांच हजार 964
सात जून - 15 करोड़ 27 लाख 88 हजार 873
पांच जून - 14 करोड़ 67 लाख 87 हजार 472