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सरलता ही सबसे बड़ा धर्म: धर्मप्रणम्य सागर

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सरलता ही सबसे बड़ा धर्म: प्रणम्य सागर
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के सातवें दिन विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य आरके जैन को हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य एनसी जैन, सलिल जैन राघवेंद्र जैन, राकेश जैन को प्राप्त हुआ। सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 101 परिवारों की ओर से विधान कराया गया।
परम पूज्य गुरुवर अर्हम योग प्रणेता मुनि 108 प्रणम्य सागर ने कहा कि सरलता ही सबसे बड़ा धर्म है। सोमवार को विधान का विसर्जन गुरुकुल के बच्चों ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन सलिल जैन द्वारा किया गया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्जवलन सुधा जैन हस्तिनापुर ने किया। चौबीसी भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नीरज जैन, हस्तिनापुर एवं गुरुकुल के बच्चों द्वारा किया गया। अध्यक्ष विनोद जैन दिल्ली, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, वेदप्रकाश जैन, राकेश जैन, रोहित जैन आदि मौजूद रहे।
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हवन पूजन के बाद निकाली कलश यात्रा
लावड़। मसूरी मार्ग स्थित प्राचीन सिद्घपीठ माता महाकाली मंदिर में सोमवार को देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा हुई। सुबह के समय हवन पूजन के साथ कलश यात्रा निकाली गई। इसके बाद भंडारा लगाया गया।
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कमेटी के सुभाष सैनी, ओमप्रकाश, रामकिशन, हुकुम सिंह आदि ने बताया कि कलश यात्रा में महिलाओं ने हिस्सा लिया। मंदिर में माता महाकाली के साथ भगवान शनि देव, मां दुर्गा, हनुमान, भैरो बाबा की मूर्ति स्थापित की गई। दोपहर में भंडारा लगाया गया और रात में माता का जागरण किया गया। संवाद
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