हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में मुनि भाव भूषण महाराज के सानिध्य में आषाढ़ अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर श्री सिद्धच्रक महामंडल विधान में रविवार को नंदीश्वरद्वीप जिनालय में जाप्य अनुष्ठान के बाद जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया।
विधान के पांचवें दिन शांतिधारा संजय जैन, गीता जैन, ऋतु जैन, जिवितेश जैन, कर्णिका जैन, देवेंद्र कुमार जैन, गीता जैन ने की। युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री, आयुष जैन शास्त्री ने शांतिधारा के महामंत्रों का वाचन किया। विधान के मध्य भाव भूषण महाराज ने कहा कि शांतिधारा करने से आदि, व्याधि, उपाधि सर्व उपद्रवों का नाश होता है। सिद्धचक्र महामंडल विधान बहुत प्राचीन विधान है। इस विधान को करने से सांसारिक कष्टों का नाश होता है एवं सिद्ध पद की प्राप्ति होती है।
उदाहरण देते हुए कहा- हे भगवन, तुम्हारी और हमारी आत्माओं के गुण समान हैं। हम में और उनमें कोई भेद है तो बस इतना है कि वह कर्मों से रहित हैं और हम कर्मों सहित हैं। आप बैरागी हैं और हम रागी हैं। आप सांसारिक दुखों से रहित हैं और हम संसार के दुख उठा रहे हैं। आप शरीर से संबंध छुटाकर परमात्मा बन गए हैं। हम आज भी कर्मों और शरीर के कारण संसार के दुखों से दुखी हैं। हे जिनेंद्र भगवन आपकी स्तुति एवं पूजन करके हम सबको आत्म बोध जागृत हो और हम भी आप जैसे अलोकिक परमार्थ सुख को प्राप्त करें।
विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। मांडले पर 128 अर्घ्य चढाए। सिद्धचक्र विधान में तीर्थ क्षेत्र के सदस्य व विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने क्षेत्र के कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, आदर्श जैन, अनंतवीर जैन, जगदीश जैन आदि श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।