छात्रों का कहना था कि शिवम पारिवारिक रूप से परेशान नहीं था बल्कि उसकी उपस्थिति कम थी। कॉलेज प्रबंधन ऐसे छात्रों से शपथ पत्र मांग रहा था। शपथ पत्र न देने पर उनका नाम काटने की धमकी दी जा रही थी। इसके चलते शिवम परेशान था। उसे हाॅस्टल की फीस के लिए भी परेशान किया जा रहा था। पुलिस ने किसी तरह समझाकर छात्रों को शांत किया।
फीस के लिए नहीं किया परेशान
कॉलेज के निदेशक डॉ. आलोक चौहान ने बताया कि पुलिस घटना की जांच कर रही है। बिहार के सभी छात्र बिहार क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत पढ़ते हैं। इसके तहत बिहार सरकार संबंधित कॉलेज की पूरी फीस कॉलेज के खाते में भेजती है। ऐसे में फीस के लिए कभी भी किसी छात्र को परेशान करने का कोई औचित्य ही नहीं है।
पिता से बीटेक न करने की जिद करता था
बीटेक निदेशक डॉ. सोमेंद्र शुक्ला ने बताया कि शिवम प्रथम वर्ष में पांच विषयों में फेल हुआ था। वह अक्सर अपने पिताजी से बीटेक नहीं करने की जिद करता था और बोलता था कि मुझसे पढ़ाई नहीं होगी। परिवार के दबाव के कारण उसे बीटेक की पढ़ाई करनी पड़ रही थी।
आत्महत्या कोई अचानक नहीं करता : मनोचिकित्सक
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि आत्महत्या के पीछे डिप्रेशन, किसी घटना का मानसिक असर और तनाव जैसी कई वजहें है। इस समस्या से जूझने वाले लोग अक्सर उदास रहते हैं और उसके मन में हर समय नकारात्मक ख्याल आते रहते हैं। कई बार ये अपने आप को परिस्थितियों के सामने इतना असहाय महसूस करते हैं कि उनके मन में आत्महत्या का ख्याल आने लगता है।
आत्महत्या जैसा बड़ा कदम कोई भी व्यक्ति अचानक नहीं उठाता है। इससे पहले वो जिन चीजों से गुजरता है उसे एक संकेत माना जा सकता है। आत्महत्या को रोकने का सबसे अच्छा तरीका इसके संकेतों, डिप्रेशन और डिसऑर्डर के लक्षणों को पहचानना है। इससे समय रहते उस व्यक्ति का इलाज कराया जा सकता है।