पुलिस के मुताबिक किशोरी की हत्या में नामजद आरोपी पप्पू के पिता मुर्सलीन की 2015 में हत्या हुई थी। जिसमें शीबा के भाई नजर और प्यार मोहम्मद जेल में बंद है। आरोपी समझौते का प्रयास कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बन रही थी। पुलिस को अंदेशा था कि किशोरी को अगवा कर गोली मारने के पीछे मुर्सलीन की हत्या के केस में समझौते का दबाव है।
पहली गलती मत करना
भावनपुर में आत्मदाह करने के छह दिन बाद आठवीं की छात्रा की मौत में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। पुलिस ने छात्रा के बयान अंकित नहीं किए थे। रविवार किठौर पुलिस ने भावनपुर जैसी गलती नहीं की। गोली लगने के बाद एसपी देहात मौके पर पहुंचे। एसपी ने सबसे पहले अस्पताल में भर्ती किशोरी शीबा के बयान दर्ज कराए। उसके बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया। आरोपी पुलिस के संपर्क में थे। मौत होते ही पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
सभी बिंदुओं पर बयान
एसएसपी मंजिल सैनी दहल ने बताया कि किशोरी की इलाज के दौरान मौत हो गई है। तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। किशोरी के दो भाई हत्या के मामले में जेल में है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है। किशोरी के बयान में दुष्कर्म जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
सुरक्षित नहीं बेटियां, ‘कठघरे’ में पुलिस
बेटियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस अफसरों के तमाम दावे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। बीस दिन लावड़ की घटना ने पुलिस अफसरों को हिलाकर रख दिया। दूसरे समुदाय के युवक ने युवती की वीडियो वायरल कर जबरन धर्मांतरण करने की कोशिश की। जिसके बाद युवती ने परेशान होकर शादी से पहले सुसाइड कर लिया था। लावड़ का मामला निपटा भी नहीं था कि भावनपुर क्षेत्र के एक गांव में छात्रा ने उत्पीड़न से परेशान होकर तेल छिड़ककर आत्मदाह कर लिया था। पूरे मामले में पुलिस की घोर लापरवाही रही। एसओ भावनपुर करतार सिंह और सीओ सदर देहात श्रीराम अर्ज को भी हटाया गया।
24 जनवरी को सोहरका गांव में मां-बेटे की हत्या की गूंज लखनऊ तक पहुंची तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठने शुरू हो गए। कायस्थ बड्ढा की 17 वर्षीय किशोरी शीबा की मौत होने के बाद एक बार फिर लगने लगा कि यहां बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
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