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शहर कूड़ा-कूड़ा, डर बीमारियों का 

Tue, 28 Aug 2018 12:02 AM IST
amarujala
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file - फोटो : amarujala
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महानगर कूड़ा-कूड़ा हो गया है। जिधर देखों उधर ही कूड़े के ढेर हैं। ढलाव घर कूड़े से भर गए हैं। पशुओं के अवशेषों से उठ रही बदबू से सांस लेना भी दुर्भर हो रहा है। पर्यावरण पूरी तरह दूषित हो चुका है। तीन दिन से शहर से कूड़ा नहीं उठ पाया है। सभी कूड़ा गाड़ी निगम के वाहन डिपो में कैद हैं। अब तो वाहन डिपों में कूड़े से भरी खड़ी कूड़ा गाड़ियों से डिपो भी डंपिंग ग्राउंड बन गए हैं। हालात जल्द न सुधरे तो ऐसी परिस्थितियों में अब बस केवल बीमारियां फैलना बाकी है। 
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जमा हो गया 4000 मीट्रिक टन कूड़ा
महानगर से रोजाना करीब 800 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। तीन दिन से शहर से एक क्विंटल कूड़ा भी नहीं उठ पाया है। बकरीद पर जिन पशुओं की कुर्बानी दी गई, उनके अवशेषों से कूड़ा बढ़ गया है। अगर फिलहाल शहर में जमा कूड़े के वजन का आकलन करें तो चार हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो गया है। जबकि कम से कम 1600 मीट्रिक टन कूड़ा यानी पशुओं के अवशेष शहर की सड़क, ढलाव घरों पर पड़े हैं। 

मशक्कत के बाद उठेगा कूड़ा 
शहर में जमा हुए कूड़े को उठाने के लिए नगर निगम के पसीने छूटेंगे। नगर निगम के पास ट्रैक्टर ट्रॉलियां और अन्य कूड़ा गाड़ियां करीब 52 हैं, जो प्रतिदिन ढलाव घरों से कूड़ा उठाकर डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाती हैं। निगम के आंकड़ों में तो शहर से रोजाना 800 मीट्रिक टन कूड़ा उठाया जाता है। अगर इसी पुरानी गति से ही कूड़े का उठान किया गया तो निगम की समस्त मशीनरी से एक सप्ताह में भी कूड़ा नहीं उठ पाएगा। वैसे भी प्रतिदिन कूड़ा बढ़ता ही जा रहा है। कूड़ा उठाने के लिए निगम की मशीनरी को पूरी मशक्कत करनी होगी।
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फूट सकता है गुस्सा 
शहर में कूड़े से परेशान जनता का गुस्सा कभी भी नगर निगम प्रशासन के खिलाफ फूट सकता है। क्योंकि जनता कूड़े की बदबू में सांस भी नहीं ले पा रही है। पूरे शहर की हवा में बदबू घुल गयी है। महानगर की जनता पार्षदों से शिकायत कर रही है। पार्षद और जनता मिलकर अधिकारियों से कूड़े की समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं। लेकिन निगम प्रशासन अभी चुप्पी साधे हुए हैं। सोमवार तक भी कूड़े को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया।  

पर्यावरण हुआ दूषित 
शहर में पशुओं के अवशेष और कूड़े से बदबू ही बदबू है। पर्यावरण दूषित हो चुका है। लेकिन निगम प्रशासन ने अभी तक भी चुप्पी नहीं तोड़ी है। विभाग अपने कर्तव्य को ही भूल गया है। माना जा रहा है कि अगर शहर से शीघ्र कूड़ा नहीं उठवाया गया तो शहर में महामारी जैसे हालात हो सकते हैं।  ग्रामीणों से नहीं की बात 
गांवड़ी के ग्रामीणों ने डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा डाले जाने का विरोध किया हुआ है। जिसके चलते निगम की कूड़ा गाड़ियों का ब्रेक लग चुका है। नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस के किसी भी अधिकारी ने न तो ग्रामीणों से बात करने का प्रयास किया है और न ही कूड़े को शहर से उठवाने की व्यवस्था की गयी है। 


सुनते ही नहीं तो क्या करें
जब से नए बोर्ड का गठन हुआ है। तभी से कूड़े की समस्या को लेकर अधिकारियों को जगाते आ रहे हैं। लेकिन कोई सुनता ही नहीं है। -मनमोहन जौहरी

कोई जवाब नहीं मिलतरा
मुस्लिम इलाकों में न तो सफाई हो रही है और न ही कूड़ा उठाया जा रहा है। पूरा शहर बदबू से सड़ा पड़ा है। कूड़ा उठाने के लिए अधिकारी कोई संतुष्ट जवाब भी नहीं देते हैं। -अहसान अंसारी

शहर कूड़े का ढेर
अब पूरा शहर कूड़े के ढेर पर बैठा है। अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंग रही हैं। जनता हमें घेर रही है। अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। -संदीप रेवड़ी

मुंह छिपा रहे
गंदगी के कारण जनता से मुंह छुपाना पड़ रहा है। अधिकारियों को जरा भी शर्म नहीं आ रही है। तीन दिन से कूड़ा नहीं उठ रहा है। बीमारी फैलने वाली है। -महेंद्र भारती

हमें शर्म आने लगी
कूड़े की शिकायत करते-करते हमें शर्म आने लगी है। लेकिन अधिकारियों के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं है। शहर में बीमारी फैलने का अंदेशा है। - शौकत अली

समाधान मेरे बस की बात नहीं 
जब तक डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा नहीं डलने दिया जाएगा, तब तक शहर से कूड़े के ढेर खत्म नहीं होंगे। गांवड़ी में डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा डलवाना मेरे बस की बात नहीं है। हमने नगरायुक्त को पत्र लिख दिया है। नगरायुक्त ही इस समस्या का समाधान डीएम और कमिश्नर से मिलकर करें। -डॉ. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

सरकार और अधिकारी नहीं चाहते समाधान 
सरकार भी नहीं चाह रही है कि शहर कूड़ा मुक्त हो। कारण है कि महापौर बसपा से है। सरकार को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए। अगर शासन और प्रशासन कूड़ा निस्तारण प्लांट लगवा देता तो आज शहर की जनता को बदबू में सांस न लेना पड़ती। नगर स्वास्थ्य अधिकारी किसी की कॉल रिसीव करने को तैयार नहीं हैं। वह नगरायुक्त से भी ऊपर हैं। वह विभाग के मंत्री की कॉल रिसीव नहीं करते तो महापौर उनके लिए क्या है। मैं कमिश्नर, डीएम, नगरायुक्त ही नहीं बल्कि शासन को भी कूड़े की समस्या पर पत्र लिख चुकी हूं। -सुनीता वर्मा, महापौर
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