खालिस्तान समर्थकों की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से जिले में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि संदिग्ध गतिविधियों को लेकर क्षेत्र काफी बदनाम रहा है। कैराना का इकबाल काना, दिलशाद मिर्जा और हामिदा पाकिस्तान से बैठकर नकली नोट और हथियारों की तस्करी का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। पाकिस्तान जाने वाले लोगों को मोहरा बनाकर गठरी व्यापार के जरिये अवैध हथियार, नकली नोट और सोना तक भिजवाया जाता है। उसके उदाहरण पूर्व में पकड़े गए मामले हैं। इसके अलावा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए सूचना लीक करने के मामले में भी कैराना का एक युवक 2016 में गिरफ्तार किया गया था। ऐसे तमाम मामले जिले में सामने आ चुके हैं।
जिले में संदिग्ध गतिविधियों का इतिहास
- कैराना निवासी इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तान में रहकर नकली नोट और हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क चला रहे हैं।
- वर्ष 2000 में गांव जौला से आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के कमांडर मोहम्मद वारस को गिरफ्तार किया गया।
- वर्ष 2005 में एसटीएफ ने शामली से पांच किलो आरडीएक्स और अत्याधुनिक असलहों के साथ जम्मू कश्मीर निवासी तीन युवकों को गिरफ्तार किया था।
- 2007 में मोहल्ला शेखज दगान निवासी साबिर पुत्र नूरा और मोहल्ला रायजादगान निवासी शकीरन अटारी बॉर्डर पर हेरोईन के साथ पकड़ी गई थी ।
- 2013 में मोहल्ला शेखजादगान निवासी शहनाज, मुल्ला नसीर और अनीस को हथियार तस्करी के आरोप में अटॉरी बार्डर पर पकड़ा गया।
- 2015 में थानाभवन के मदीना कालोनी में रह रहा बांग्लादेशी यासीन परिवार सहित फरार हो गया था। उसने राशन कार्ड भी बनवा लिया था।
- 2016 में गंगेरू निवासी इस्माईल को अटारी बॉर्डर पर टिन के बॉक्स में चार पिस्टल और सात मैगजीन के साथ दबोचा गया।
- नवंबर 2016 में नाभा जेल ब्रेक कर खालसा लिब्रेशन फ्रंट के चीफ सहित छह आतंकियों को भगाने का मास्टर माइंड परमिंदर उर्फ पिंदा कैराना से गिरफ्तार किया गया।
- अक्तूबर 2016 को कैराना निवासी फरहत खान को दिल्ली में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
- मई 2018 में कैराना के गांव पंजीठ निवासी मुल्तानी और उसके समधी को अटॉरी बॉर्डर पर कूकर में पिस्टल छिपाकर लाते हुए गिरफ्तार किया गया था।
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