अस्पताल में नहीं रख सकते 50 से अधिक इंजेक्शन
क्राइम ब्रांच के प्रभारी उमेश रोरिया ने बताया कि ये इंजेक्शन गाजियाबाद व नोएडा में बनाए जाते हैं। ये इंजेक्शन ऑपरेशन से पहले लगते हैं। इन्हें रखने का लाइसेंस 250 के लगभग है, जबकि अस्पतालों में 50 से अधिक नहीं रख सकते। बताया कि ये लोग नशे के आदी छात्र-छात्राओं को स्कूल के बाहर भी बेचते हैं। उन्होंने जहां इंजेक्शन की सप्लाई करते हैं, उनके नाम भी बताए।
हार्ट अटैक में अधिक दर्द होने पर होता है इस्तेमाल
नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल ने बताया कि पेटाजेशियन इंजेक्शन लगातार लगाने से व्यक्ति नशे का आदी बन जाता है, आमतौर पर इस इंजेक्शन का इस्तेमाल उस समय करते हैं, जब हार्ट अटैक आने पर अत्यधिक दर्द होता है और वह नहीं रुकता। वहीं इसका इस्तेमाल हल्के नशे के लिए ऑपरेशन में भी किया जाता है, लेकिन आजकल नशा करने वाला व्यक्ति इसका इस्तेमाल करते हैं और आदी हो जाने पर वह फिर इसके बिना नहीं रह सकता और शारीरिक स्थिति बिगड़ती चली जाती है।
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