विलाप करते परिजन और जवान का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में शामली जनपद के गांव लांक निवासी बीएसएफ जवान विकास कुमार का पार्थिव शरीर बुधवार को घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सांत्वना देने वालों का भी तांता लगा है। वहीं जवान की पत्नी पम्पा मेहता ने आरोप लगाया है कि उनके पति की हत्या की गई है। उनका कहना है कि उन्हें वहां पर शव नहीं दिखाया गया। गांव में आने के बाद ही शव को दिखाया गया। पम्मा भी बीएसएफ में ही तैनात हैं।
उधर, जवान के पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचने की सूचना पर एडीएम अरविंद कुमार सिंह, एएसपी राजेश श्रीवास्तव भी गांव में पहुंच गए हैं। फिलहाल गांव में पंचायत चल रही है। परिजनों की मांग है कि शव का दोबारा से पोस्टमार्टम होना चाहिए। परिजनों ने यह भी कहा कि जवान को शहीद का दर्जा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
ये है पूरी घटना
गांव लांक निवासी विकास कुमार (25 वर्ष) पुत्र भंवर सिंह कश्यप बीएसएफ में कांस्टेबल के पद वर्तमान में पश्चिमी बंगाल में नदिया जिले के सीमानगर में तैनात थे। रविवार की रात परिजनों को बीएसएफ अधिकारियों ने फोन कर गोली लगने से विकास की मौत होने की सूचना दी थी। मंगलवार को भी जवान का शव गांव नहीं लाया जा सका। जवान के चचेरे भाई कमल नयन ने बताया कि बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि रात में किसी समय फ्लाइट से दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा।
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वहीं बीएसएफ जवान के पिता भंवर सिंह कश्यप, मां मानो देवी, बहनें सुशीला और बबीता समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सदर विधायक तेजेंद्र निर्वाल भी मंगलवार को गांव में पहुंचे थे। उन्होंने जवान के परिजनों को सांत्वना दी थी।
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