शहीद जयद्रथ की यूनिट में उसके साथ रहे भाई सहदेव ने बताया कि जयद्रथ अपनी यूनिट का बहादुर और जांबाज सिपाही था। दुश्मनों के नाम से उसका खून खौल उठता था। पिछले साल भी हमला हुआ था, जिसमें उसकी उंगली में गोली लगी थी और पैरों में कई छर्रे लगे थे। लेकिन जयद्रथ उस समय भी बिल्कुल भी विचलित नहीं हुआ था और दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। इस बार भी पाकिस्तान की ओर से धोखे से गोलीबारी न की होती तो उसका भाई आज न सिर्फ जीवित होता, बल्कि दुश्मनों को सबक सिखा देता।
जयद्रथ से न मिल पाने का जिंदगी भर मलाल रहेगा
शहीद जयद्रथ का भाई
सहदेव को अपने भाई शहीद हुए जयद्रथ से न मिल पाने का जिंदगी भर मलाल रहेगा। सहदेव ने बताया कि वह यूनिट में लगातार दो साल तक उसके साथ एक कमरे में रहा था। उसके बाद जयद्रथ तो यूनिट में रहा और वह आरआर में चला गया। काफी महीनों से मुलाकात नहीं हुई थी। जयद्रथ की यूनिट का ट्रांसफर जयपुर हो गया था। इसलिए जयद्रथ 20 दिन की छुट्टी लेकर 6 जुलाई को पत्नी ममता को जयपुर में शिफ्ट करने के लिए लेकर गया था जिससे जयपुर में वह क्वार्टर रिजर्व करा सके। जयद्रथ 20 दिन की छुट्टी लेकर गांव आया तो उसने भी छुट्टी की अर्जी दे दी थी। उसने सोचा कि काफी दिन बाद दोनों भाई गांव में मिल लेंगे। लेकिन उसकी छुट्टी देर से मंजूर हुई। 16 जुलाई को जयद्रथ अपनी छुट्टी पूरी कर ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए चला गया, जबकि 16 जुलाई को ही वह एक माह की छुट्टी पर गांव में पहुंचा। कुछ ही घंटे पहले जयद्रथ निकल गया। वह उससे मिल नहीं पाया, यह पता नहीं था कि अब कभी नहीं मिल पाएगा।
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