दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का छठा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के छठे दिन 108 भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि धार्मिक कार्य ही पाप कर्मों के नाश का माध्यम हैं। सांसारिक कार्यों से पाप क्षय नहीं होता, बल्कि प्रभु भक्ति और धर्म साधना से ही आत्मकल्याण संभव है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रोच्चार के साथ कराया। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अर्पित जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा आशीष जैन व संयम जैन ने की, दीप प्रज्ज्वलन शिल्पी जैन और रूपा जैन ने किया। सुनीता दीदी ने समस्त जीवों की मंगलकामना के साथ शांति मंत्रों का उच्चारण कराया। देव-शास्त्र-गुरु पूजन एवं आदिनाथ भगवान की पूजा के पश्चात सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित किए गए और 48 अर्घ्यों के साथ भक्तामर विधान संपन्न हुआ।
विधान के मध्य मंगल प्रवचन में भाव भूषण महाराज ने कहा कि पाप कर्म अत्यंत हठी होते हैं और उनका नाश केवल प्रभु भक्ति, साधना और धार्मिक अनुष्ठानों से ही संभव है। जब व्यक्ति श्रद्धा और समर्पण के साथ धर्म मार्ग पर चलता है, तभी आत्मा की शुद्धि होती है और जीवन में सच्चा सुख प्राप्त होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित पूजा-पाठ, स्वाध्याय और संयमित जीवन अपनाने का आह्वान किया। 151 परिवारों की ओर से विधान आयोजित कराया गया। देश के विभिन्न शहरों से आए श्रद्धालुओं ने पाठ में भाग लिया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ प्रशांत जैन ने किया। विधान का विसर्जन दिलीप जैन ने किया। क्षेत्रीय पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद