बहुत से लोग खुद का बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं। बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाते हैं। लेकिन, ऐन वक्त पर कदम पीछे खींच लेते हैं। कोई पैसे न होने के कारण पीछे हटता है तो कोई घाटे के डर से। इसके उलट एक तस्वीर आपको ऐसी दिखाते हैं, जिनके पास न तो बहुत अच्छी एजूकेशन है और न ही स्किल। पैसा तो उनके पास दूर-दूर तक नहीं है। लेकिन, छोटी तैयारी और बड़ा हौसला दिखाकर इन्होंने अपना मुकाम बना लिया। कल तक नौकरी के लिए मोहताज थे। आज दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। नौकर नहीं मालिक हैं। इन्हें सिंड ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से स्किल सीखकर खुद का बिजनेस खड़ा किया है।
पहले सीखा, अब सिखा रहे
नीरज आर्य की कसेरूबक्सर में मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, सीसीटीवी रिपेयर की शॉप है। एक साल पहले उन्होंने मोबाइल रिपेयर की ट्रेनिंग ली। शॉप खोली और सर्विस देनी शुरू की। एक साल में ही अपनी जगह बना ली। दो लड़कों को रोजगार दे रखा है। अहम बात यह है कि बीएड करने के बाद नौकरी नहीं मिल रही थी। नीरज ने स्किल सीखने के लिए शार्ट टर्म ट्रेनिंग ली। अब वह पीछे मुड़कर नहीं दे रहे। जहां पर पहले ट्रेनिंग ली, वहां अब खुद सिखा रहे हैं।
नौकरी छोड़ बने फोटोग्राफर
तेजगढ़ी निवासी मदन सिंह सागर ने आईटीआई से टर्नर का कोर्स किया था। शुरू में सात हजार रुपये की नौकरी मिली। इतने में खर्च नहीं चल रहा था। 2011 में फोटोग्राफी की ट्रेनिंग ली और तेजगढ़ी पर फोटोग्राफी की शॉप खोली। शादी और पार्टी के ऑर्डर के अलावा एडिटिंग का भी काम है। मदन के मुताबिक उन्होंने स्टूडियो में तीन लड़कों को जॉब दे रखी है। पांच साल में काम करते हुए स्टूडियो से ही मकान खरीदा। दुकान भी अपनी है। 40-50 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। मदन का कहना है किसी भी काम की स्किल अगर आपके पास है तो फोकस होकर काम करें। कामयाबी जरूरी मिलेगी।
पति के लिए नायक बन गईं प्रिया
गढ़ रोड स्थित नेहरू नगर निवासी प्रिया जैन 10वीं पास हैं। पढ़ाई ज्यादा नहीं की इसलिए नौकरी के बारे में सोचा नहीं। लेकिन खर्च में पति गौरव जैन का हाथ बंटाना था। सिंड ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से लेडीज टेलरिंग एंड ड्रेस डिजाइनिंग फोर वूमेन की 21 दिन की ट्रेनिंग ली। इसके बाद घर पर बुटीक शुरू करने के लिए बैंक से 50 हजार रुपये का लोन लिया। घर पर ही काम शुरू कर दिया। प्रिया घर पर ही 10 से 15 हजार रुपये कमा लेती हैं। एक लड़की को भी रोजगार दे रखा है। धीरे-धीरे काम बढ़ाने की योजना है। गौरव का कहना है जब से प्रिया ने काम शुरू किया है, उनका बोझ भी कम हुआ है।
संस्थान के बारे में
सिंड ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार और सिंडिकेट बैंक द्वारा प्रायोजित है। इसमें महिला और पुरुषों को निशुल्क स्वरोजगार शुरू करने के लिए शार्ट टर्म ट्रेनिंग दी जाती है। कम से कम छह दिन और अधिकतम 45 दिन की ट्रेनिंग है। प्रशिक्षार्थी को 500 रुपये जमा कराने होते हैं, जो कि रिफंडेबल हैं। सुबह नौ से शाम पांच बजे तक ट्रेनिंग दी जाती है। खाना और नाश्ता भी दिया जाता है। पुुरुषों के रहने की भी व्यवस्था है। संस्थान जेलचुंगी स्थित सिंडिकेट बैंक के रीजनल ऑफिस बिल्डिंग में दूसरी मंजिल पर है।
बीटेक से बीएड तक वाले
सिंड ग्रामीण विकास स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से निशुल्क प्रशिक्षण लेने वालों में बीटेक से लेकर बीएड पास आउट करने वाले शामिल हैं। एमए और एमकॉम करने के बाद कई ने कोर्स किए हैं।