मेरठ। देश की आन-बान-शान भारतीय सेना की ताकत देखकर हर किसी का सीना फख्र से चौड़ा हो गया। क्या बच्चे, क्या अभिभावक हर कोई सेना के हथियारों को देखकर यही बोला...सैल्यूट इंडियन आर्मी। पाइन डिवीजन की 313 फील्ड रेजीमेंट द्वारा औघड़नाथ मंदिर के पास आयोजित दो दिवसीय सेना को जानो कार्यक्रम में कितने ही युवाओं ने भारतीय सेना में करियर बनाने की नई राह चुनी। शहर से 45 सौ से अधिक बच्चों-अभिभावकों ने कारगिल, 1971 और 1965 के युद्घ में दुश्मन को नेस्तनाबूद करने वाले सेना के हथियारों की बारीक से जानकारी ली।
सेना को जानो प्रदर्शनी के दूसरे सुबह नौ बजे से ही स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट मैदान में सजे सेना के हथियारों के पास लगे स्टॉल पर पहुंच गए। हर कोई युद्घ में इस्तेमाल होने वाले इन हथियारों के बारे में जानने को उत्सुक दिखा। रूस में निर्मित 130 एमएमए-46 तोप जिस तरह से 1600 मीटर तक टारगेट को नष्ट कर सकती है उसमें रेडिया सेट की कितनी भूमिका होती है। रेडियो सेट के बिना पहाड़ी इलाकों में युद्घ कैसे संभव नहीं है। इन तमाम बारीक तथ्यों के बारे में भी बच्चों को जानकारी दी गई। एनसीसी कैडेट समेत दूसरे स्कूलों के बच्चों ने सेना में करियर बनाने के बारे में भी अफसरों से जानकारी ली। तमाम युवा यहां से यही संकल्प लेकर निकले कि एक दिन वे भी भारतीय सेना का अंग बनकर देश की सेवा करेंगे। प्रदर्शनी में पहले दिन जहां 26 सौ बच्चे-अभिाभवक पहुंचे, वहीं रविवार को दो हजार से अधिक लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
देशभक्ति के तरानों ने किया जोश दोगुना
सेना के हथियारों की प्रदर्शनी के दौरान मैदान में बज रहे देशभक्ति तरानों ने युवाओं का जोश दोगुना कर दिया। भारत माता के जयकारे गूंजते रहे। अभिभावक बच्चों को बता रहे थे कि देखो सेना के जवानों के पास कितने ताकतवर हथियार हैं। इनके होते देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। 18 गढ़वाल के पाइप बैंड की प्रस्तुति हर किसी को आकर्षित करती रही।
यह हथियार रहे प्रदर्शनी में शामिल
हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर,
प्रदर्शन में आर्टिलरी, इनफेंटरी, क्यूआरटी, इंजीनियरिंग इक्विपमेंट के साथ बच्चों-अभिभावकों ने तमाम हथियारों के बारे में जानकारी ली। इनमें 130एमएम एम-46 गन, कमांड पोस्ट, 122एमएम-30 हाउजर गन, 105 एमएम लाइट फील्ड गन, मोटर गार्डर, बोट असॉल्ट यूनिवर्सल, 81 एमएम मोर्टार, 84 एमएम रॉकेट लांचर, 7.62 एमएम एमएमजी, 105-37 लाइट फील्ड गन ई-2, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल लांचर , टैंक को भेदने की क्षमता रखने वाले एटीजीएम मिसाइल लांचर आदि शामिल रहे। इसके अलावा ड्रोन को रडार सिस्टम से पकड़ने के बाद उसको नष्ट करने की तकनीक की जानकारी वाले स्टॉल पर खूब भीड़ रही।
अभिभावक बोले, बच्चों को दिखाने लाए सेना का शौर्य
बच्चों के साथ पहुंची नेहा लूथरा ने बताया कि वो खुद आर्मी के बैक ग्राउंड से हैं लेकिन पड़ोस के बच्चों ने भी यहां आने की इच्छा जताई तो वह सबको लेकर आई हैं। बच्चे यहां आकर खूब इंज्वॉय कर रहे हैं। परिवार के साथ पहुंची मंजरी जैन ने बताया कि बेटी को आर्मी बहुत अच्छी लगती है, ऐसे में वह परिवार के साथ यहां पर आई हैं। निमेश सिंह ने बताया कि भारतीय सेना के बारे में युवा पीढ़ी को बताने के लिए परिवारों के साथ ऐसे आयोजन में जाना चाहिए।