स्कूलों में बनेंगे नो एंगर जोन, ताकि गुस्से पर काबू रखना सीखें छात्र
शालू अग्रवाल
मेरठ। स्कूलों में छात्रों को गुस्सा क्यों आता है इसक ा पता सीबीएसई लगाएगा, साथ ही गुस्से पर काबू रखने के लिए उन्हें काउंसिलिंग भी देगा। छात्रों में बढ़ते तनाव और गुस्से और असहनशीलता को नियंत्रित करने के लिए सीबीएसई ने विद्यालयों में नो एंगर जोन बनाने का निर्देश दिया है।
बच्चों में बढ़ते तनाव और गुस्से को कम करने क ी शुरुआत अब विद्यालयों से ही होगी। स्कूलों में नो एंगर जोन बनेंगे। इन जोन में छात्रों को गुस्सा व तनाव कम करने के तरीके बताए जाएंगे। काउंसलर की नियुक्ति होगी जो छात्रों को गुस्से के नुकसान बताएंगे। जिन छात्रों को अधिक गुस्सा आता है या तनाव रहता है तो उसका उपचार भी यहां होगा। सीबीएसई ने इस सत्र से स्कूलों को यह नई शुरुआत करने का निर्देश दिया है।
समाज में बढ़ते आत्महत्या के मामलों, तनाव के कारण नशे की गिरफ्त में पहुंच रहे छात्रों के मन को शांत करने के लिए सीबीएसई ने यह पहल की है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने विद्यालयों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि हर विद्यालय में नो एंगर जोन बनाया जाए। इस जोन में तनाव दूर करने वाली गतिविधियां, गेम्स हों। काउंसलर की नियुक्ति की जाए। साथ ही स्ट्रेस चार्ट बनाए जाएं। इन स्ट्रेस चार्ट के ज़रिए छात्रों के तनाव और गुस्से को मापा जाए।
बोर्ड ने इस संबंध में एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कहा है कि शिक्षक, अभिभावक और स्कूल प्रशासन सभी अपने गुस्से पर काबू रख छात्रों के सामने मिसाल पेश करेंगे। सीबीएसई के अनुसार इस पहल से छात्र मानसिक तौर पर सक्रिय, भावनात्मक रूप से स्वस्थ होंगे। जॉयफुल एजुकेशन एंड होलिस्टिक फिटनेस के तहत यह पहल बोर्ड ने की है।
ध्यान, योग और संगीत से करते हैं चित्त शांत
सीबीएसई ने जॉयफुल एजुकेशन और होलिस्टिक फिटनेस वाले माहौल की बात कही है वो माहौल शहर के कई स्कूलों विभिन्न गतिविधियों के जरिये छात्रों को दिया जा रहा है। स्कूलाें में सुबह प्रार्थना के साथ योग व ध्यान कराया जाता है। छात्रों को ध्यान के माध्यम से चित्त को शांत करने की जानकारी दी जाती है। स्कूल परिसर में बेहद धीमी आवाज़ में गायत्री मंत्र, ऊं क ी ध्वनि बजती है जो मस्तिष्क को शांत रखें।