- जागृति विहार एक्सटेंशन पर हुई भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि माता यशोदा का भगवान के प्रति वात्सल्य भाव, उद्धव और अर्जुन का साख्य भाव, राधा एवं गोपियों का माधुर्य भाव एवं संतों का दास्य भाव भक्तिभाव के प्रमुख स्वरूप हैं।
कथा व्यास ने कहा कि जिस भाव से भक्त भगवान को स्वीकार करता है। भगवान भी उसी भाव से उसके समक्ष प्रकट होते हैं। उन्होंने बताया कि वृंदावन में भगवान ने बांसुरी और द्वारिका में पांजन्य शंख का नाद किया। शरद पूर्णिमा की रात्रि में निधिवन में गोपियों के साथ महारास के लौकिक, दैविक एवं आध्यात्मिक पक्षों को विस्तार से समझाया गया। इसके साथ ही गोपी गीत, भ्रमर गीत सहित अन्य विषयों से जुड़े प्रसंग सुनाए गए।
स्वामी ने आगे उग्रसेन के राज्याभिषेक, सांदीपनि आश्रम में शिक्षा, उद्धव गोपियों संवाद, जरासंध के 17 आक्रमणों के साथ ही रुक्मिणी विवाह की कथा भी सुनाई। उन्होंने कहा कि दूसरों के सुख में स्वयं को सुखी मानना ही प्रेम है। कार्यक्रम में यजमान बीडी पांडेय एवं बीना पांडेय ने व्यास पूजन किया गया।