मंदिर प्रकरण : दूसरे पक्ष ने आरोपों को खारिज किया
मेरठ। शास्त्री नगर में शिव मंदिर को तोड़ने के मामले में बृहस्पतिवार को दूसरे पक्ष के लोगों ने भी चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने कुछ लोगों पर निजी स्वार्थ साधने के लिए धार्मिक भावना भड़काने और झूठा केस दर्ज कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि घर में बना निजी मंदिर सार्वजनिक संपत्ति नहीं हो सकता है।
गढ़ रोड पर हुई प्रेस वार्ता में एडवोकेट आशुतोष गर्ग ने कहा कि नई सड़क के पास 394.41 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की एक संपत्ति 141/1 नगर निगम के दस्तावेजों में नानू के नाम पर दर्ज थी। 22 दिसंबर, 1998 को नानू ने अपने पुत्र राजेंद्र को वसीहत कर दी। नानू की मौत के बाद संपत्ति राजेंद्र के नाम हो गई। इसी संपति में परिवार ने निजी मंदिर बनाया था। इसके बाद अगस्त, 2019 को राजेंद्र ने दो बेटों योगेश सैनी और कृष्ण गोपाल सैनी के नाम संपत्ति कर दी। अप्रैल, 2020 में योगेश और कृष्ण गोपाल ने अपनी संपत्ति पर बने निजी मंदिर को हटा दिया। पूर्व पार्षद वीरेंद्र शर्मा ने इसका विरोध किया और अवैध रूप से धन की मांग की। मांग पूरी न होने पर पुलिस प्रशासन पर दबाव बना उनके खिलाफ केस दर्ज करा दिया।
इस दौरान मौजूद विवेक शर्मा ने बताया कि 25 जनवरी, 2021 को उन्होंने यह संपत्ति योगेश और कृष्ण गोपाल से खरीद ली। पूर्व पार्षद ने फिर विरोध तेज कर दिया। इस बार वीरेंद्र शर्मा और सतीश गर्ग भी विरोध में खड़े हो गए। इन्होंने मंदिर तोड़ने की साजिश रची और उनके भाई मुकुल शर्मा पर केस दर्ज करा दिया। विवेक के पिता मिथलेश कुमार शर्मा ने कहा कि उनकी ओर से कोई मंदिर नही तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि निजी मंदिर को सार्वजनिक बताकर कुछ लोग माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। आवास एवं विकास परिषद के नक्शे में भी मंदिर जैसा कोई विवरण दर्ज नहीं है। प्रेसवार्ता में एडवोेकेट समीर वर्मा भी मौजूद रहे।