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36 घंटे से बंद पड़ा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट

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मेरठ.........वेतन न मिलने के विरोध में मंगलवार को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में ताला लगाकर विरोध प्रदर्श
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मेरठ।
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जागृति विहार में काली नदी के किनारे बना सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बीते 36 घंटों से बंद पड़ा है। एक साल से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों ने प्लांट में तालाबंदी कर दी है। उन्होेंने वेतन मिलने के बाद ही प्लांट संचालन की चेतावनी दी है। उसके बाद भी जल निगम अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। हालात यही रहे तो 24 घंटे के भीतर शहर की सड़कों पर सीवर का गंदा पानी बहना शुरू हो जाएगा। मंगलवार को तो कर्मचारियों ने प्लांट पर हंगामा भी किया। उन्होंने जलनिगम अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया।
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन और रखरखाव पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ जनता को नहीं मिल रहा है। इस सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को ज्योति बिल्टेक कंपनी के कर्मचारी चला रहे हैं। उन्हें बीते एक साल से वेतन नहीं मिला है। इस कारण कर्मचारियों ने सोमवार को ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन बंद कर दिया। 36 घंटे बाद भी प्लांट चालू नहीं हो पाया है। यही हाल रहा तो अगले 24 घंटे में शास्त्रीनगर, जागृति विहार, लोहियानगर ही नहीं शहर के कई इलाकों की सीवर लाइनें चोक होनी शुरू हो जाएंगी। सीवर सड़कों पर बहने लगेगा।
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आधी क्षमता से चल रहा प्लांट
जागृति विहार में लगे इस सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 100 एमएलडी है, लेकिन प्लांट तक 40 एमएलडी सीवर का गंदा पानी भी नहीं पहुंच पा रहा है। जेएनएनयूआरएम योजना के तहत जल निगम ने 300 करोड़ से भी ज्यादा प्लांट और सीवर लाइनों में खर्च किया था। अभी भी सीवर पर लगातार खर्च हो रहा है।
नमामि गंगे को लगा पलीता
केंद्र सरकार ने नदियों को साफ करने के लिए नमामि गंगे योजना के तहत नालों पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए हैं। करोड़ों रुपये योजनाओं पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन नदियों में साफ पानी नहीं पहुंच रहा है। अगर हम काली नदी की बात करें तो उसमें भी सीवर का गंदा पानी पहुंच रहा है। इससे पूरी योजना को पलीता लग रहा है। वह अलग है कि प्लांट संचालन और रखरखाव के नाम पर सरकारी खजाना लुटाया जा रहा है।
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वर्जन=====
प्लांट संचालन में लगे कर्मचारियों को काफी समय से वेतन नहीं मिला है। ये कर्मचारी ज्योति बिल्टेक कंपनी के हैं। शासन से धन की मांग की गई है। हमनें कर्मचारियों को वेतन दिलवाने का आश्वासन दिया है। दिसंबर से दूसरी कंपनी प्लांट संचालन करेगी। वह कंपनी इन्हीं कर्मचारियों से काम कराएगी।
-रमेश चंद, परियोजना प्रबंधक जलनिगम।
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