चार्जशीट में एससीएसटी की धारा बढ़ाई गई
मुजफ्फरनगर। शुकतीर्थ स्थित गौड़ीय मठ में बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने एससीएसटी एक्ट और जेजे एक्ट की धाराएं बढ़ गई हैं। एससीएसटी एक्ट के लगने के बाद अब सरकार प्रत्येक बच्चे को सहायता राशि के रूप में चार-चार लाख रुपये देगी। जिला प्रशासन ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
चार्जशीट में त्रिपुरा और मिजोरम दोनों जनजाति राज्य है, इसलिए इस मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम व लैंगिग उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण के (पॉक्सो) अधिनियम धाराएं लगाई गई हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भारत सरकार ने जिला जज राजीव शर्मा और डीएम सेल्वा कुमारी जे को पत्र जारी कर नियमानुसार सभी बच्चों को आर्थिक क्षति पूर्ति दिलाने के लिए निर्देशित किया है। आयोग के पत्र के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों को सरकार आर्थिक सहायता के रूप में चार लाख रुपये देती है। पीड़ित बच्चों में छह मिजोरम और चार त्रिपुरा के हैं। पुलिस इस मामले की एफआईआर और चार्जशीट की कार्रवाई बच्चों के संबंधित जिलों को भेजेगी। यह प्रक्रिया समाज कल्याण विभाग और प्रोबेशन विभाग के माध्यम से पूरी होगी।
जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
जिला प्रोबेशन अधिकारी मुशफेकिन का कहना है कि एसएसी एसटी के उत्पीड़न के शिकार बच्चों की सरकार आर्थिक सहायता करती है। एक बच्चे के परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की जाती है। जिला प्रशासन इस प्रक्रिया को पूरी करने में लगा है। जल्द ही एसएसपी की ओर से इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट संबंधित बच्चों के गृह जनपद में चली जाएगी। वहीं से इनके परिजनों को यह पैसा जारी होगा।
यह है मामला
शुकतीर्थ में फिरोजपुर मार्ग स्थित गौड़ीय मठ पर सात जुलाई को चाइल्ड हेल्प लाइन और बाल कल्याण समिति की टीम ने छापा मारकर आठ बच्चों को मुक्त कराया था। अगले दिन आठ जुलाई को दो और बच्चों को मठ से मुक्त कराया गया। मिजोरम और त्रिपुरा के इन बच्चों को पढ़ाई के लिए यहां रखा गया था। नौ जुलाई को बाल कल्याण समिति और पुलिस ने बच्चों के बयान लिए तो मठ संचालक का अमानवीय चेहरा सामने आया। बच्चों ने बताया कि उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा था। डॉक्टरी परीक्षण में चार बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई। चाइल्ड हेल्प लाइन की राखी देवी की ओर से भोपा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई और नौ जुलाई की रात में ही मठ संचालक भक्ति भूषण गोविंद महाराज और उसके शिष्य कृष्णमोहन दास को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले की जांच कर रहे सीओ भोपा राजेश कुमार द्विवेदी ने 25 दिन में जांच पूरी कर न्यायालय में चार्ज शीट दाखिल कर दी है।