मेरठ। करीब 10 माह बाद बुधवार को स्कूल तो खुल गए, लेकिन छात्रों की उपस्थिति कम रही। स्कूल गेट पर ही माता-पिता का सहमति पत्र जांचा गया। इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद उन्हें कक्षाओं में भेजा गया।
स्कूलों में सामाजिक दूरी के नियमों का पालन कराया गया। कुछ स्कूलों में मैदान में तो कई ने कक्षा में ही प्रार्थना कराई। पांच घंटे स्कूल चले। 30 फीसदी छात्र ही स्कूल पहुंचे। द अध्ययन स्कूल में कक्षाओं में सीटों पर पहले ही छात्रों के नाम लिखे थे। छात्रों के आईडी कार्ड के क्यूआर कोड को स्कैन करके हाजिरी ली गई। महावीर इंटरनेशनल स्कूल में छठवीं से बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राएं पहुंचे। पढ़ाई के साथ आर्ट एंड इंटीग्रेशन के बारे में बताया। प्रधानाचार्य नरेश कुशवाहा ने कोरोना से बचाव की जानकारी दी। एमपीएस की मेन विंग को गुब्बारों से सजाकर बच्चों का स्वागत किया गया। दीवान पब्लिक स्कूल, जीटीबी, सोफिया गर्ल्स स्कूल सभी में सामाजिक दूरी के साथ कक्षाएं हुईं।
फोन कर बुलाए गए छात्र-छात्राएं
शासन के निर्देश पर बुधवार को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई शुरू हुई। शासन के निर्देशानुसार बनाए गए रोस्टर के तहत बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में कक्षा आठ के छात्रों को बुलाया गया था। शिक्षकों के लगातार कॉल करने के बाद भी पहले दिन बच्चों की संख्या बहुत कम रही। कहीं यह हाल था कि विद्यालय में शिक्षक चार थे और बच्चों की संख्या आठ। कंपोजिट विद्यालय सरायकाजी में कक्षा 8 के 17 बच्चों को बुलाया गया था लेकिन 7 बच्चे ही मौजूद रहे। कक्षा आठ की छात्रा रेखा ने बताया कि 10 माह बाद स्कूल में पढ़ाई की है।
बच्चों को दिए मास्क
शासन के रोस्टर के अनुरूप ही बच्चों को बुलाया गया है। अभी शुरुआत है। बच्चों को मास्क दिए गए। सैनिटाइजर का भी प्रयोग किया गया। कोरोना गाइडलाइन का प्रयोग किया गया। सत्येंद्र सिंह ढाका, बीएसए
मेरठ स्कूल फेडरेशन ने परिवहन मंत्री को दिया ज्ञापन
मोदीपुरम। वेद इंटरनेशनल स्कूल सिवाया के चेयरमैन तथा मेरठ स्कूल फेडरेशन के कोऑर्डिनेटर अजीत कुमार ने स्कूली बच्चों को हो रही यातायात संबंधी परेशानियों के विषय में परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से उनके लखनऊ आवास पर मुलाकात की। अभिभावकों को हो रही परेशानियों से मंत्री को अवगत कराया तथा उन्हें इस संबंध में एक पत्र सौंपा।
मंत्री ने पूरी क्षमता के साथ स्कूल बसें चलाने के लिए समस्त जनपदों के आरटीओ को स्कूल बसों के फिटनेस परमिट आदि कार्य प्राथमिकता से करने के आदेश दिए।
डर लग रहा है
स्कूल खुलना ठीक है मगर बच्चे को स्कूल भेजने में डर लग रहा है। ऑनलाइन कक्षाएं बंद हो गई हैं मजबूरी में स्कूल भेजना पड़ेगा। - अनुराधा
स्कूलों को लेनी होगी जिम्मेदारी
स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन बच्चे को स्कूल भेजने में डर लगता है। स्कूलों में कोरोना से बचाव के नियमों का पूरा पालन होना चाहिए। - आरती सिंघल
नियमों का पालन जरूर हो
स्कूल खुलें मगर वहां नियमों का पूरा पालन गंभीरता से होना चाहिए। बच्चे खुद नहीं समझते, उन्हें सामाजिक दूरी बनाने के लिए बार-बार कहना पड़ेगा। -अनु शर्मा
जल्दबाजी का है निर्णय
अभी स्कूल नहीं खुलने चाहिए थे। छोटे बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं ही होनी चाहिए थीं, अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है। यह निर्णय जल्दबाजी में लिया गया है।- उमेश पंवार
दस माह बाद दोस्त से मिला
पूरे दस महीने बाद अपने दोस्तों से मिला हूं, बहुत मजा आया। हम सब दूर-दूर बैठे थे। मैडम ने हमें गले भी नहीं मिलने दिया न हाथ मिलाने दिया। - अरहन
बस दूर से कर ली बात
स्कूलों में गए तो दोस्तों से मिले, लेकिन मैडम ने दूर से ही बात करने के लिए कहा। हमारी सीट पर ही नाम लिखा था वहीं बैठना था। अभय सिंह राणा
क्लास में ही प्रेयर
क्लास में ही प्रेयर हुई। मैडम ने हमें टिफिन भी साथ में नहीं खाने दिया। सभी बच्चों ने अपनी सीट पर बैठकर ही टिफिन किया। - आयुष्मान
साथ नहीं खेल सके
मम्मी-पापा कहीं घुमाने ले नहीं जाते, बाहर खेलने भी नहीं जाने देते कहते है कि बीमार हो जाओगे। आज स्कूल आया तो दोस्त से मिला। मगर साथ खेल नहीं सके। - हर्ष