पहला आदेश 27 अप्रैल को 10 हजार मीटरों के लिए मैसर्स मॉडर्न ट्रांसफार्मर्स गाजियाबाद के लिए था। दूसरा आदेश 28 अप्रैल को 10 हजार मीटरों के लिए मैसर्स जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जयपुर के लिए किया गया। इसके अलावा तीसरा आदेश 11 मई को 13 हजार मीटरों के लिए मैसर्स मॉडर्न ट्रांसफार्मर्स प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद के लिए था। इन सभी 33 हजार मीटरों की खरीद से लेकर निरीक्षण तक के काम को मनीष कुशवाह ने अंजाम दिया।
मुख्य अभियंता को है निरीक्षण की जिम्मेदारी देने का अधिकार
- यूपीपीसीएल चेयरमैन ने खरीदी गई सामग्री का निरीक्षण/परीक्षण कराने की जिम्मेदारी देने का अधिकार मुख्य अभियंता (सामग्री प्रबंधन) को दिया हुआ है। 11 अप्रैल 2018 के आदेश में स्पष्ट है कि डिस्कॉम द्वारा गठित पैनल में रोस्टर अनुसार अधिकारियों को नामित करने का उत्तरदायित्व मुख्य अभियंता सामग्री प्रबंधन को होगा।
सामग्री के निरीक्षण के कार्यों का अनुश्रवण करने का उत्तरदायित्व संबंधित अधीक्षण अभियंता का होगा। इसके अलावा सामग्री के डिस्पेच से पूर्व फर्म के परिसर पर थर्ड पार्टी निरीक्षण कराने का प्रावधान है। इस टीम के साथ विभाग का भी एक अधिकारी रोस्टर के अनुसार नामित किया जाता है, लेकिन इस मामले आदेश का पालन ही नहीं किया गया।
ये मामला वाकई गंभीर है। टेंडर करने वाला अधिकारी खरीदी गई सामग्री का निरीक्षण नहीं कर सकता है। वे इस मामले की जांच कराएंगे। जो भी अधिकारी इसमें दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। विभाग में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ