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एनएच-119 का मुआवजा तय करने में किया बड़ा खेल, साठ गांठ कर बदल दी गई जमीनों की श्रेणी

Mon, 07 Jan 2019 01:17 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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राष्ट्रीय राजमार्ग - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ-पौड़ी मार्ग पर नजीबाबाद यानी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के भू अधिग्रहण में खेल सामने आ रहा है। आरोप है कि जब गजट हुआ, तब जमीन को किसी दूसरी श्रेणी में दर्ज किया गया और बाद में जब अवार्ड के लिए सर्वे किया तो उसकी श्रेणी बदल दी गई। इस प्रकरण की शिकायत डीएम से लेकर आयुक्त और शासन तक की गई है।

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लगभग सौ किमी लंबे हाईवे केलिए यूं तो 69 गांवों की जमीन का अधिग्रहण होगा। लेकिन मेरठ के इसमें 19 गांव शामिल किए गए हैं। महानगर में इस हाइवे की प्रस्तावित लंबाई 32 किमी होगाी। फिलहाल गांवों का गजट नोटिफिकेशन हो चुका है और तीन गांवों का मुआवजा तय कर सूची जारी हो गई है। बाकी गांवों का अवार्ड के लिए सर्वे कर सूची एनएचएआई को भेजी जा चुकी है। जल्द ही बाकी गांवों का मुआवजा भी तय हो जाएगा।

इन्हीं गांवों में खेल
इस हाईवे की अधिसूचना यानी गजट 13 मार्च 2018 को जारी किया गया था। इसे बाद अब अवार्ड का काम चल रहा है। डीएम से लेकर सीएम तक को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि यहां खेल हो रहा है। लोगों से सेटिंग कर जमीनों की श्रेणी बदल दी गई। वह भी गजट जारी होने के बाद।

केस स्टडी के साथ सारा ब्यौरा भेजा गया है। जैसे नंगली ईसा गांव में गजट जारी हुआ तो यहां एक पेट्रोल पंप को कृषि भूमि दर्शाया गया। अब उसे आवासीय यानी अकृषि दर्ज कर दिया गया। मवाना खुर्द में कई खसरों में खेल की बात कही जा रही है। चार खसरे ऐसे हैं जिनकी श्रेणी गजट के बाद बदली गई है। यहीं एक खसरा नंबर को स्कूल बताकर अवार्ड से छोड़ दिया गया है। मवाना में ही एक विवाह मंडप का गजट कृषि भूमि में किया गया। अब इसकी श्रेणी बदल दी गई।
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दलालों की आ रहीं शिकायतें
इसके अलावा यह भी शिकायतें की गई हैं कि एडीएम भू अध्याप्ति कार्यालय से सेटिंग कर कुछ लोग गांवों में जाकर किसानों से बात कर रहे हैं। ये दलाल हैं, जो कह रहे हैं कि उनकी श्रेणी भी बदली जा सकती है और मुआवजा भी जल्दी दिलाया जा सकता है। इस प्रकरण पर जांच शुरू हो गई है।

आरोप पूरी तरह से गलत
आरोप पूरी तरह से गलत हैं। हमने केवल दो ही श्रेणी रखी हैं। हमने और एनएचएआई ने संयुक्त सर्वे किया है। यह एनएचएआई की जिम्मेदारी है कि वह किसको क्या मुआवजा दे। अभी तो सभी गांवों का अवार्ड भी नहीं हुआ है। दलाल छोड़ने की भी बात ठीक नहीं है। - ज्ञानेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति 
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