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SC-ST एक्ट: दलित आंदोलन से भाजपा को लगा तगड़ा झटका

Tue, 03 Apr 2018 03:00 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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गाड़ियों में लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा की दलितों को अपने पक्ष में करने की कवायद को इस आंदोलन ने झटका दिया है। जिस तरह आंदोलन का तरीका रहा और उसे हिंसक करके भीड़ व पुलिस प्रशासन को आमने सामने किया गया, उससे साफ नजर आया कि इसके पीछे नियोजित सोच रही। क्योंकि मंच पर तमाम विपक्षी दलों के नेता नजर आये तो बसपा नेताओं के हाथों में मुख्य कमान रही। 

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सोमवार को हुआ राष्ट्रव्यापी आंदोलन लगभग हर जगह ही हिंसक रहा। विपक्षी दलों ने अपनी सधी हुई रणनीति के तहत इस आंदोलन को तैयार किया। जिससे एक तरफ जहां पुलिस प्रशासन और आंदोलनकारी सामने आये तो आंदोलन जब हिंसक हुआ तो पुलिस प्रशासन के साथ सवर्ण बिरादरियां भी खड़ी हो गई। मेरठ में आंदोलन की मुख्य कमान बसपा के हाथ में नजर आई। लेकिन समर्थन में सपा और कांग्रेस के लोग भी नजर आये। इसके साथ ही दलितों के बीच संपर्क बनाये रखते हुए उन्हें शांत रहने और सरकार की तरफ से इस मामले में पैरवी का आश्वासन दिये जाने का संदेश देने की बात कही गई थी।

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पूर्व विधायक अमित अग्रवाल के घर में घुसे उपद्रवी

मेरठ बवाल की फोटो - फोटो : अमर उजाला
दोपहर में करीब एक बजे दो दर्जन से ज्यादा उपद्रवियों ने पूर्व विधायक अमित अग्रवाल के घर पर हमला बोला। लेकिन इसी बीच पीछे से आ रही पुलिस ने उन्हें खदेड़ लिया। पुलिस को देख तीन उपद्रवी अमित अग्रवाल के घर में छिप गए। हल्ला होने पर पूर्व विधायक के पुत्र वरुण अग्रवाल बाहर निकले। बाहर मौजूद इंस्पेक्टर लिसाड़ी गेट मोहम्मद असलम ने वरुण अग्रवाल से कहा कि वह उपद्रवियों को बाहर निकालें। इस पर वरुण ने कहा कि उनकी तबीयत खराब है और वह स्वयं फोर्स के साथ जाकर उन्हें बाहर ले आए। लेकिन इंस्पेक्टर ने वरुण अग्रवाल पर ही उपद्रवियों को शरण देने का आरोप लगा डाला। 

इस बीच सूचना पाकर पूर्व विधायक अमित अग्रवाल भी घर पहुंचे, तो इंस्पेक्टर बिना उपद्रवियों को बाहर निकाले फोर्स के साथ वापस लौट गए। इस पर अमित अग्रवाल ने एसपी सिटी से फोन पर बात की, जिसके बाद इंस्पेक्टर सिविल लाइन फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस ने किसी तरह घर के भीतर छिपे तीन उपद्रवियों को बाहर निकाला। इसके बाद भाजपाइयों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी।

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