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UP: यहां भगवान शिव की आराधना करती थीं रावण की पत्नी मंदोदरी, 1857 की क्रांति को संजोए है ये ऐतिहासिक मंदिर

Sat, 15 Jul 2023 11:35 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

Sawan Shivratri 2023 : रावण की पत्नी मंदोदरी इस ऐतिहासिक मंदिर में भगवान शिव की आराधना करती थीं। वहीं, बाबा औघड़नाथ मंदिर 1857 की प्रथम क्रांति के इतिहास को संजोए है। पढ़िए अमर उजाला की यह खास स्टोरी।
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सिद्धपीठ बिल्वेश्वर नाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में सदर स्थित श्री बिल्वेश्वर नाथ मंदिर ऐतिहासिक सिद्धपीठ माना जाता है। इस मंदिर में बिल्वेश्वर नाथ, जगन्नाथ जी और बाला जी का मंदिर स्थापित है। मेरठ को रावण की ससुराल माना जाता है। रावण की पत्नी मंदोदरी यहां शिव जी की आराधना करने आती थी। मंदिर में भगवान शिव के सामने विष्णु, बालाजी, काली माता और हनुमान मंदिर है।

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गर्भगृह में भगवान शिव की पिंडी है। इसके सामने संगमरमर के बने नंदी हैं। मंदिर के दूसरे हिस्से में एक और पिंडी है और साथ में गणपति की मूर्ति। यह मंदिर मराठा मध्यकालीन स्थापत्य शैली पर बना हुआ है। मराठाकालीन मंदिर एक किले की तरह बनाए जाते थे। मध्य में मंदिर और चारों ओर से विशाल दीवारें व कोठियां हैं। मंदिर की वास्तुकला पेशवा समय की है। 

वहीं, शिव मंदिर के सामने एक दीवार में कुछ मूर्तियां हैं। यह 10वीं और 12वीं शताब्दी की बताई जाती हैं।

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1857 की प्रथम क्रांति के इतिहास को संजोए हैं बाबा औघड़नाथ मंदिर
छावनी स्थित बाबा औघड़नाथ शिव मंदिर प्राचीन सिद्धपीठ है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। मान्यता है कि मंदिर में दर्शन मात्र से भी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। परतंत्र काल में भारतीय सेना को काली पल्टन कहा जाता था। यह मंदिर काली पल्टन क्षेत्र में होने के कारण काली पल्टन के नाम विख्यात हुआ। मंदिर की स्थापना का कोई निश्चित समय नहीं हैं। मंदिर में मध्य विशाल शिव मंदिर, एक तरफ राधा गोविंद मंदिर और दूसरी तरफ दुर्गा मंदिर हैं। मंदिर का विशाल सत्संग भवन में वर्ष भर में कई बड़े धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं।

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श्रावण और फाल्गुन माह में हजारों कांवड़िया हरिद्वार से जल लाकर यहां जलाभिषेक करते हैं। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की भूमिका में इस देव स्थान का प्रमुख स्थान रहा है। सुरक्षा एवं गोपनीयता के लिए उपयुक्त शांत वातावरण के कारण अंग्रेजों ने यहां सेना का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया। भारतीय पल्टनों के निकट होने के कारण इस मंदिर में अनेक स्वतंत्रता सेनानी आते थे। मंदिर प्रांगण मे कुएं में सेना के जवान पानी पीते थे। इसी ऐतिहासिक कुएं पर बांग्लादेश के विजेता तत्कालीन मेजर जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के द्वारा स्थापित शहीद स्मारक क्रांति के गौरवमय अतीत का ज्वलंत प्रतीक है।
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