जलाभिषेक का लाभ
जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि, कुशा जल से अभिषेक करने पर रोग, दु:ख से छुटकारा मिलता है। दही से अभिषेक करने पर पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी प्राप्ति होती है। मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर धन वृद्धि होती है। तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है। दूध से अभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति, प्रमेह रोग की शांति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गंगाजल से अभिषेक करने से ज्वर ठीक हो जाता है। दूध शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से सद्बुद्धि प्राप्त होती है। घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होता है। सरसों के तेल से अभिषेक करने से रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
शिव मंदिर में गूंजे भोले के जयकारे
सावन के दूसरे सोमवार को लालकुर्ती स्थित श्रीरामा संकीर्तन मंदिर में 41 दिवसीय शिव महापुराण कथा आयोजित हुई। कथा व्यास पंडित हरीश उनियाल ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया। वीनू मृग, मिनी सचदेवा और नवीना छाबड़ा ने बम भोले के जयकारे लगाए।
ट्रस्ट के महामंत्री सुरेश छाबड़ा ने तप की शक्ति पर प्रकाश डाला। उधर, बाबा मनोहरनाथ मंदिर सूरजकुंड में बारह ज्योर्तिलिंग की महिमा का वर्णन हुआ। महामंडलेश्वर निलिमांनंद महाराज ने पूजन किया। मंदिर में हवन का आयोजन किया गया।
बागपत में सावन के दूसरे सोमवार को पुरा महादेव मंदिर में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने को शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। रात दो बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू गई थी। घंटों लाइन में लगकर श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर परिसर और बाहर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि आज 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। मंदिर में शिवरात्रि की भी तैयारी शुरू हो चुकी हैं। इस बार शिवरात्रि 6 अगस्त की है।