अभियोजन पक्ष ने कहा- अपराध की गंभीरता को देखते हुए मिले कड़ी सजा
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए अदालत से दोनों दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने वारदात की क्रूरता, पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वासघात और शव को छिपाने के लिए अपनाए गए तरीके को अपनी दलीलों का आधार बनाया।
अभियोजन की दलील के मुताबिक, मुस्कान ने सौरभ राजपूत से प्रेम विवाह किया था, लेकिन बाद में साहिल शुक्ला के साथ मिलकर उसकी हत्या की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने यह भी रखा कि हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में छिपाने के लिए सीमेंट का इस्तेमाल किया गया।
अभियोजन पक्ष का कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ऐसी सजा दी जानी चाहिए, जिससे समाज में कानून के प्रति भरोसा मजबूत हो और गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश जाए।
बचाव पक्ष ने दो बेटियों के भविष्य का दिया हवाला
दूसरी ओर, बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने दोषियों के लिए नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने अदालत के समक्ष मुस्कान की दो बेटियों के भविष्य और उनके पालन-पोषण से जुड़ा मुद्दा उठाया।
बचाव पक्ष की दलील थी कि दोनों बच्चियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सजा तय करते समय इस पहलू पर भी विचार किया जाना चाहिए। जानकारी के मुताबिक, मुस्कान की बड़ी बेटी ननिहाल में रह रही है, जबकि छोटी बेटी जेल में उसके साथ है।
बचाव पक्ष ने इन परिस्थितियों के आधार पर अदालत से कम सजा देने का अनुरोध किया। अब अदालत को अभियोजन की ओर से उठाए गए अपराध की गंभीरता के पहलुओं और बचाव पक्ष की ओर से पेश की गई परिस्थितियों पर विचार करना है।
यह भी पढ़ें: सौरभ हत्याकांड: मुस्कान-साहिल की सजा पर फैसला कुछ देर में, कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों की हुई तीखी बहस
नीला ड्रम केस में फैसले का इंतजार, मेरठ से प्रदेशभर की निगाहें अदालत पर
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने अपनी क्रूरता और जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम के कारण देशभर में चर्चा बटोरी थी। पुलिस जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और अभियोजन की पैरवी के बाद अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया था। अब मामला सजा तय किए जाने के चरण में है।
बुधवार को सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। अभियोजन पक्ष ने जहां फांसी की मांग की है, वहीं बचाव पक्ष ने बेटियों के भविष्य का हवाला देकर राहत देने की अपील की है।
जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत से लंच के बाद फैसला सुनाएंगे। अदालत का अंतिम आदेश ही स्पष्ट करेगा कि दोनों दोषियों को किस प्रकार की सजा दी जाती है।