नोटबंदी के बाद से सहकारी बैंकों में कैश की समस्या बरकरार है। किसानों को कैश नहीं मिल पा रहा है। चीनी मिलों ने करीब 22 करोड़ रुपये के गन्ना भुगतान की एडवाइजरी सहकारी बैंकों में भेज दी है, लेकिन सहकारी बैंकों का खजाना खाली होने से किसानों को भुगतान नहीं मिल रहा है।
राष्टीयकृत बैंकों को चेस्ट ब्रांच के माध्यम से कैश भेजा जाता है। जिला सहकारी बैंकों में चेस्ट ब्रांच की व्यवस्था नहीं होती है। इन बैंकों को राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से ही कैश मुहैया कराया जाता है। नोटबंदी के बाद से राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश की किल्लत होने से सहकारी बैंकों में भी कैश नहीं पहुंच रहा है। मेरठ के जिला सहकारी बैंक से मेरठ और बागपत जिले के 53 सहकारी बैंक जुडे़ हैं। इनमें करीब तीन लाख किसानों के खाते हैं। हाल ही में सहकारी बैंकों में बागपत, रमाला, टिकौला, दौराला, मवाना आदि कई चीनी मिलों से करीब 22 करोड़ रुपये के गन्ना भुगतान की एडवाइजरी भेजी जा चुकी है, लेकिन सहकारी बैंकों के पास कैश नहीं है।
बैंक नहीं खुलने देने की चेतावनी
ग्रामीण क्षेत्रों के कई सहकारी बैंकों में 10 दिन से कैश नहीं पहुंचा है। इस कारण बैंकों में स्टाफ से अभद्रता हो रही है। बुधवार को बहसूमा, रोहटा और जानी क्षेत्र में कैश नहीं मिलने से गुस्साए लोगों ने अफसरों को फोन कर जाम लगाने और धरने की धमकी दी। रोहटा के किसानों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह ब्रांच नहीं खुलने देंगे।
आठ करोड़ के आदेश, मिले दो करोड़
जिला सहकारी बैंक के जीएम सतीश कुमार, एजीएम लेखा विनय चौधरी एडीएम फाइनेंस के सामने यह मुद्दा उठा चुके हैं। एडीएम फाइनेंस ने आठ राष्ट्रीयकृत बैंकों को एक-एक करोड़ देने का लैटर जारी किया है। इनमें से भी केवल तीन बैंकों से ही केवल दो करोड़ रुपये सहकारी बैंकों को दिए गए हैं।