मेरठ। परतापुर के कुंडा गांव स्थित रतिराम खूबचंद आयल डिपो से सोमवार को पुलिस ने फिर से सैंपल लिए हैं। जो जांच के लिए आगरा एफएसएल भेजे जाएंगे। सवाल सरकारी मशीनरी पर उठ रहे हैं कि पूर्व में भी सैंपल लिए गए, इसके बावजूद पुलिस को सवा महीने बाद सैंपल की जरूरत पड़ी।
विवेचक श्यौराज सिंह ने बताया कि इस संबंध में कोर्ट में अर्जी लगाई थी कि डिपो में जमीन में दबे टैंकों से केरोसिन के सैंपल लेने हैं। कोर्ट के आदेश पर सोमवार को परतापुर पुलिस ने इंडियन ऑयल कंपनी के कर्मचारियों को बुलाकर सैंपल लिए। इंस्पेक्टर परतापुर एके मिश्रा का कहना है कि इस प्रकरण की विवेचना हो चुकी है। सैंपल जांच रिपोर्ट आते ही विवेचना कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि सीसीटीवी कैमरे के द्वारा फर्म में जमीन में दबे तेल से भरे टैंकों की सीसीटीवी कैमरों, पुलिस और सेक्टर मजिस्ट्रेट की निगरानी के दौरान बिजली कनेक्शन कटा था। इस दौरान बिजली कट हो गई थी, जिसके बाद कई चर्चाएं चली थीं। हालांकि विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक बिजली कट के दौरान इन्वर्टर से सीसीटीवी कैमरे चलते रहे। जिसमें अधिकारियों ने बिजली कट के दौरान की फुटेज देखी है। वहीं, फर्म के मालिक संजय कुमार के अधिवक्ता रामकुमार ने भी अंदेशा जताया था कि टैंकों में जो 70 हजार लीटर केरोसिन बताया जा रहा है, वह बारिश का पानी हो सकता है। उन्होंने भी टैंकों की खोदाई कराने की बात कही थी। टैंकों की खोदाई नहीं हुई। चर्चा है कि तेल में कोई खेल तो नहीं हुआ है, इसको देखते यह सैंपल लिया गया है।
सैंपल लेने के पीछे क्या राज
इस आयल डिपो से सात सितंबर को एडीएम सिटी, जिला आपूर्ति टीम, नापतौल और परतापुर थाना पुलिस की मौजूदगी में तीन-तीन सैंपल लिए गए थे। जिला आपूर्ति विभाग द्वारा लैब में जांच के लिए भेजा गया। पुलिस को अंदेशा था कि सैंपल में गड़बड़ी हो सकती है। उसको लेकर पुलिस ने तीन अलग-अलग फोरेंसिक लैब से जांच कराने की बात कही थी। लेकिन जिला आपूर्ति विभाग द्वारा सैंपलों को एक ही लैब में भेजना बताया था। इसको लेकर पुलिस और प्रशासन के बीच पत्राचार हुआ था। पुलिस ने सवा महीने बाद सैंपल लिए हैं। सवाल उठता कि आखिर सैंपलों की जांच ठीक से क्यों नहीं हो रही। कहीं आरोपियों को बचाने की साजिश तो नहीं है।