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हम में भी है दम, नहीं किसी से कम, इस बेटी का हुनर जान करेंगे सलाम

Mon, 12 Mar 2018 04:41 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सुनील कैथवास, मेरठ
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पूजा यादव - फोटो : अमर उजाला
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मशहूर शायर बशीर बद्र का ये शेर शहर की माधवपुरम निवासी पूजा यादव पर सटीक बैठता है। जिन्होंने पुरुषों के प्रभुत्व वाले ड्राइविंग के प्रोफेशन को अपनाकर एक मिथक तोड़ा कि पुरुष ही ऑटो या टैक्सी चला सकते हैं। संभवत: पूजा मेरठ की पहली युवती हैं, जो वैन से स्कूली बच्चों को घर और स्कूल छोड़ने का काम करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए पूजा ने 12वीं कक्षा में ही हाथों में स्टेयरिंग थाम लिया। आज वह पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम बखूबी अपने काम को कर रही हैं। 

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पूजा तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। माता गृहणी है। पिता सुरेश चंद आर्मी की नौकरी छोड़ने के बाद ऑटो से स्कूली बच्चों को छोड़ने का काम करते हैं। करीब दो वर्ष पूर्व वे बीमार पड़ गए तो पूजा ने पापा के काम को बाधित नहीं होने दिया।

बेटी के कहने पर दिलाई वैन
पिता की बीमारी के दौरान पूजा ने पूरे सप्ताह ऑटो से बच्चों को स्कूल छोड़ने का काम किया। इसके बाद पूजा ने पापा से वैन दिलाने की बात कही और बच्चों को स्कूल तक छोड़ने का काम करने को कहा। इस पर उसके पिता ने दिल्ली रोड स्थित गुरु तेग बहादुर स्कूल की प्रिंसिपल रेखा बंसल से बात की। उन्होंने भी पूजा के साहस को देखते हुए सहमति जताई। इसके बाद पिता सुरेश चंद ने उन्हें वैन दिला दी।
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सुबह 4:00 बजे से रूटीन शुरू
शहीद मंगल पांडे महिला महाविद्यालय से बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा पूजा ने इस काम को पार्ट टाइम अपनाने का फैसला किया। पूजा सुबह चार बजे उठकर रनिंग करती हैं फिर नाश्ते के बाद पढ़ाई। आठ बजते ही पूजा अपनी वैन से बच्चों को स्कूल छोड़ती हैं और वापस लाती हैं। पूजा का कहना है कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद रेलवे में बतौर ड्राइवर नौकरी करना चाहती हैं।

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महिलाएं सुरक्षित ड्राइवर 

स्कूली बच्चों के साथ पूजा यादव - फोटो : अमर उजाला
पांचवीं में पढ़ने वाली दिव्यांशी की मां रेनु कहतीं हैं कि पुरुष ड्राइवर की अपेक्षा महिला ड्राइवर लड़कियों के लिए सुरक्षा की मुहर हैं। पूजा के साथ बिटिया को स्कूल भेजते समय पूर्ण सुरक्षा का अहसास होता है।  

अब बेटी पर मुझे गर्व
पूजा के पिता सुरेश चंद को बेटा न होने का मलाल था। लेकिन पूजा ने उनका बेटा बनकर उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है। सुरेश चंद का कहना है कि मेरी बेटी कंधे से कंधा मिलाकर परिवार की मदद करती है। उनकी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। पूजा ने उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है। 

प्रिंसिपल जीटीबी स्कूल रेखा बंसल का कहना है कि पूजा यादव स्कूली बच्चों को छोड़ने वाली मेरठ की पहली युवती है। उसे मौका देने वाली मैं भी पहली प्रिंसिपल हूं। मेरी अपील है कि कोई और महिला ड्राइवर यदि साहस करें तो मैं उसे भी मौका दूंगी।

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