स्कूली बच्चों के साथ पूजा यादव
- फोटो : अमर उजाला
पांचवीं में पढ़ने वाली दिव्यांशी की मां रेनु कहतीं हैं कि पुरुष ड्राइवर की अपेक्षा महिला ड्राइवर लड़कियों के लिए सुरक्षा की मुहर हैं। पूजा के साथ बिटिया को स्कूल भेजते समय पूर्ण सुरक्षा का अहसास होता है।
अब बेटी पर मुझे गर्व
पूजा के पिता सुरेश चंद को बेटा न होने का मलाल था। लेकिन पूजा ने उनका बेटा बनकर उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है। सुरेश चंद का कहना है कि मेरी बेटी कंधे से कंधा मिलाकर परिवार की मदद करती है। उनकी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। पूजा ने उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है।
प्रिंसिपल जीटीबी स्कूल रेखा बंसल का कहना है कि पूजा यादव स्कूली बच्चों को छोड़ने वाली मेरठ की पहली युवती है। उसे मौका देने वाली मैं भी पहली प्रिंसिपल हूं। मेरी अपील है कि कोई और महिला ड्राइवर यदि साहस करें तो मैं उसे भी मौका दूंगी।
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