अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराते रहे
परिजनों ने महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय पहले जांडखेड़ा में झाड़-फूंक कराने के लिए पहुंचाया। इसके बाद भी कई जगह झाड़-फूंक और उपचार कराया गया। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
करीब तीन घंटे बाद पहुंची सीएचसी
हालत गंभीर होने पर परिजन रात करीब नौ बजे मुर्तजा को गंगोह सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित वालिया ने बताया कि महिला को रात करीब नौ बजे अस्पताल लाया गया था। उन्होंने कहा कि सांप के डसने के तुरंत बाद महिला को अस्पताल लाकर जरूरी उपचार दिया जाता तो उसकी जान बचने की संभावना थी।
डॉक्टर ने की झाड़-फूंक में समय न गंवाने की अपील
डॉ. रोहित वालिया ने लोगों से अपील की कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक के चक्कर में समय न गंवाएं। पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाएं, ताकि समय पर जरूरी उपचार मिल सके।
समय पर इलाज नहीं मिलने से चली गई जान
मुर्तजा की मौत ने एक बार फिर सांप के काटने के बाद समय पर उपचार की जरूरत को सामने ला दिया है। चिकित्सकों के अनुसार ऐसे मामलों में अस्पताल पहुंचने में हुई देरी बेहद खतरनाक हो सकती है।