प्रवेश और निकासी के लिए बैरियर लगाए गए। ड्यूटी के लिए निर्धारित अफसरों और कर्मचारियों को लगाया गया। इसके बावजूद यहां यात्री ही नहीं आए। रेलवे टिकट पर्यवेक्षक बिशन लाल ने बताया कि तीन ट्रेनों से महज 85 रुपये का ही किराया मिल सका है, वह भी चंडीगढ़ और देहरादून जाने वाले दो यात्रियों से।
सामान्य दिनों में ट्रेन जाती तो 30 से 50 हजार रुपये तक मिलते
रेलवे के ही एक अधिकारी ने बताया कि यदि सहारनपुर से दिल्ली और देहरादून तक सामान्य दिनों में कोई ट्रेन चलती तो 30 से 50 हजार रुपये तक किराए के रूप में मिल सकते थे। किसी भर्ती और परीक्षा के समय तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता। लेकिन कोरोना काल में एग्जाम स्पेशल चलाकर भी हालात ऐसे हैं।
ये भी मानी जा रही वजह
रेलवे से जुड़े स्टाफ के ही कुछ सदस्य मानते हैं कि एनडीए एग्जाम के लिए यहां के प्रतिभागियों का सबसे नजदीकी परीक्षा केंद्र देहरादून ही था। चंडीगढ़ और दिल्ली की दूरी अधिक है। इसलिए देहरादून का विकल्प अधिक रखा गया होगा।
वैसे भी देहरादून तक जाने के लिए अधिकतर यात्री निजी वाहनों से ही निकल जाते हैं। फिर इसमें चाहे बाइक हो, कार या अन्य वाहन। कुछ प्रतिभागी ऐसे भी रहे होंगे जिन्होंने कोरोना संक्रमण के डर से यह परीक्षा छोड़ दी होगी।