पहले हुई जांच किया था गुमराह
अधिकारियों के मुताबिक 2012 में इस मामले की जांच की गई थी, लेकिन तब शासन को गुमराह किया गया था। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि मौके पर मदरसा है। रमजान की छुट्टी के चलते मदरसे में छात्र नहीं मिले हैं। विभागीय अधिकारी बदले जाने के बाद पुन: जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया है। इस मामले कई विभागीय कर्मचारियों की गर्दन फंस रही है।
पहले भी कई बार हो चुका फर्जीवाड़ा
प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद मदरसों का ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया था। सहारनपुर में पंजीकृत 400 मदरसे हैं। 2017 में मदरसों का ऑनलाइन पंजीकरण हुआ था। तब, 18 मदरसे कागजों में चलते मिले थे, जिनकी तत्काल प्रभाव से मान्यता रद्द कर दी गई थी, लेकिन उन मदरसों को संचालित करने वाले लोगों से आज सरकार से प्राप्त की गई धनराशि की रिकवरी नहीं हुई है। यह मामला सुर्खियां रहा था, लेकिन उसके बाद जांच की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब विभाग की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही आरोपियों रिकवरी की जाएगी। वह शासन को रिपोर्ट भेज चुके हैं।
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