घर-घर जाते गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र
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जातीय हिंसा से सुलग रहे शब्बीरपुर और आसपास के गांवों में अब माहौल शांति की ओर लौटने लगा है। बृहस्पतिवार को गृह सचिव के नेतृत्व में पूरा प्रशासनिक अमला शब्बीरपुर में घर-घर पहुंचा और शांति की अपील की।
अफवाहों को लगाम देने के लिए दोपहर 12 बजे से जिले भर में मोबाइल पर इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। हिंसा के छह मामलों में 96 नामजद और 600 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। देर शाम गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने पत्रकारों से कहा कि एक महीने से सहारनपुर में हो रही हिंसा सुनियोजित षड्यंत्र के तहत कराई जा रही है। उधर, शब्बीरपुर जाने की कोशिश कर रही पूर्व केन्द्रीय मंत्री शैलजा कुमारी को सहारनपुर की सीमा पर ही रोक दिया गया। देवबंद के भाजपा विधायक ब्रिजेश सिंह बिना सूचना के गांव पहुंच गए। हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद वे लौट गए।
उन्होंने कहा कि बिना पुख्ता प्रमाण के किसी के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं जाएगी। शासन-प्रशासन संयम बरत रहा है, मगर संयम की सीमा तोड़ी गई तो सीआरपीसी और आईपीसी के तहत कार्रवाई की जाएगी। शब्बीरपुर में एक बहुत बुजुर्ग व्यक्ति और एक विकलांग महिला को आरोपी बनाया गया है। इसलिए दर्ज एफआईआर को अच्छे विवेचकों से जांच कराई जाएगी। इसके लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाएगा।
भीम सेना के नक्सली कनेक्शन पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि अराजकता और समाजद्रोह पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, जैसी घटनाएं यहां हुई हैं, सहारनपुर की हवा ऐसी नहीं है। हिंसा की घटनाओं में बाहरी लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने हिंसा के पीछे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में कमी को स्वीकार किया और कहा अधिकारियों की मौजूदगी में उग्रता से साफ है कि हमारी दृढ़ता व कार्यप्रणाली में कमी है।
प्रशासन ने जिले भर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सर्वदलीय बैठक भी की। भीम सेना के संस्थापक चंद्रशेखर की गिरफ्तारी पर भी कहा कि ऐसा नहीं है कि हम कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। मगर, अधिकारी नए आए हैं और दो दिन में परिणाम सामने होगा। प्रशासन ने जिले भर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सर्वदलीय बैठक भी की। इस दौरान एडीजी एलओ आदित्य मिश्र, आईजी एसटीएफ अमिताभ यश, डीआईजी सुरक्षा विजय भूषण सहित अन्य लोग मौजूद रहे।