उन्होंने कहा कि अनुसूचित लोगों के इलाकों में ही ठेके खुलवाए जा रहे हैं, समाज का विकास रोका जा रहा है। समाज के लोगों को शराब पिलाकर गुमराह किया जा रहा है, लालच दिया जा रहा है। गांव-गांव शराब बंटवाई जा रही है। इससे तो लोग मरेंगे ही, सरकार लोगों की हत्या करने में मदद कर रही है। यह सब षड्यंत्र रचा गया है। लोग मर जाएंगे तो वोट नहीं दे पाएंगे, यह नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने के लिए कहा है, लेकिन इससे तो एक बेटी की शादी भी नहीं हो सकती, जबकि संपन्न लोगों को तीस लाख रुपये की मदद दी जाती है। उन्होंने कहा कि शराब से मरने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिले एवं सरकारी नौकरी दी जाए। इसके लिए सिर्फ एक दिन का समय दिया जा रहा है। यदि न्याय नहीं मिला, तो सोमवार से आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कि उत्तराखंड के गांव बालूपुर में शराब बिक्री के विरोध में भीम आर्मी ने वर्ष 2016 में आंदोलन किया था। भीम आर्मी के लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए थे। उस समय शराब बंद करा दी गई थी, लेकिन जब से भाजपा की सरकार आई है तब से फिर अवैध धंधा शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा घटनाक्रम हो गया, लेकिन अब से पहले पुलिस एवं आबकारी विभाग आंख बंद किए हुए बैठे रहे। डीएम, कमिश्नर निर्दोष लोगों पर रासुका लगाते हैं, अब कितने लोगों पर रासुका लगाएंगे।
शराब छोड़ने का संकल्प लें लोग
चंद्रशेखर ने कहा कि शराब के चक्कर में अपने बच्चों को बर्बाद मत करो। घर में खाने को रोटी नहीं, इलाज के लिए पैसे नहीं, फिर शराब क्यों पीते हो। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति शराब गांव तक पहुंचा रहा हो, उसे गांव में नहीं घुसने दिया जाए। ऐसे लोगों पर वह रासुका लगवाए जाने का प्रयास करेंगे। घर में भी शराब किसी को न पीने दो। चाहे लड़ाई हो जाए। उन्होंने कहा कि शराब बंद नहीं की तो नाश हो जाएगा। जब लोग ही नहीं रहेंगे तो किसके लिए लड़ा जाएगा। शराब किसी का भला नहीं कर सकती।
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