आत्ममंथन का आह्वान
साध्वी प्राची ने कहा कि अन्य समुदाय संगठन के बल पर आगे बढ़े, जबकि हिंदू समाज आंतरिक विभाजन में उलझा रहा। अब समय आ गया है कि समाज आत्ममंथन कर एकजुट होने का संकल्प ले।
राष्ट्रीय नेतृत्व को कमजोर करने से बचने की अपील
यूजीसी के नए नियमों पर सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर विरोध इस तरह नहीं होना चाहिए जिससे देश के राष्ट्रीय नेतृत्व को कमजोर करने का प्रयास हो। समाज को सजग रहकर राष्ट्रहित में निर्णय लेने की जरूरत है।
संगठन और संस्कार की शक्ति पर जोर
उन्होंने संघ के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, संस्कार और संगठन की ताकत ही समाज की असली पूंजी है। सम्मेलन में अन्य वक्ताओं ने भी सामाजिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों पर अपने विचार साझा किए।